नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सत्यशोधक समाज , ब्रह्मो समाज , प्रार्थना समाज , सर्वोदय समाज ने धर्म और ईश्वर को कभी भी नकारा नही इस लिए वो समाज में सुधार कर सके। आज परिवर्तनवादी नास्तिक समझे जा रहे है इस लिए समाज उनसे दूर जा रहा है ऐसा प्रतिपादन विजय दिवान ने किया है किया है। पुणे के कोथरुड में गांधी स्मारक निधी द्वारा आयोजित गांधी दर्शन शिबीर में दिवान बोल रहे थे। आचार्य विनोबा भावे के शिष्य विजय ने बताया 19 मार्च 1948 को सर्वोदय के स्थापना संबोधन में विनोबा जी ने कहा RSS कि जड़े गहरी है , वो पंजाब में काम करे या मद्रास में उसके सलाहकार महाराष्ट्र से होते है। गांधी का नियम था सत्य , RSS का नियम है असत्य। विनोबा बताते है कि मैने पढ़ा है कि गोलवलकर ने अपने एक लेख मे लिखा है कि हिन्दू धर्म का आदर्श पुरुष अर्जुन है। धर्म ग्रंथों का अर्थ लगाने का संघ का अपना खास तरीका है। विजय कहते है आपातकाल में संघ को अमृत पिलाया गया जे पी आंदोलन की हवा अपने अंदर भरकर आज वो सत्ता में है। केवलानंद सरस्वती के तीन शिष्य आचार्य विनोबा भावे , पा वा काने , तर्कतीर्थ लक्ष्मण शास्त्री जोशी।

केवलानंद सरस्वती और महात्मा गांधी ये विनोबा जी के गुरु थे। सोमनाथ मंदिर सब के लिए खोला गया तब उसकी प्राण प्रतिष्ठापना केवलानंद जी और लक्ष्मण शास्त्री जोशी ने की। आज भी वाई में केवलानंद जी द्वारा लिखी 11 हजार पोथीया उपलब्ध है उन्होने धर्म कोष बनवाया। विनोबा जी ने मनु शासन लिखा जो स्मृति का सुधारित सारांश है। उनकी मधुकर नामक किताब में सिकंदर का खास प्रसंग है उसे पढ़कर आपको पता चलेगा कि पुतले होने चाहिए या नहीं। 1 से 8 अक्टूबर के दौरान कोथरुड के गांधी भवन मे आयोजित गांधी सप्ताह का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय ओक के हाथो किया गया। इस सप्ताह में अनेक चिंतकों ने अलग अलग विषयों पर अपनी राय रखी। गांधी स्मारक निधी के प्रमुख डॉ कुमार सप्तर्षि के नेतृत्व में संस्था देश समाज को गांधी जी के विचारो से जोड़ रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मान्यवरो द्वारा रखे गए शानदार संबोधन जो हमेशा ताज़े है वह आप विचारको के लिए मौजूद है।

