अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी और अल हुदा एजुकेशनल सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में “एक शाम शहीदों के नाम” मुशायरे का आयोजन हिन्दुस्तानी अकैडमी सभागार में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रख्यात गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. नाज़ फातिमा, विशिष्ट अतिथि डॉ. मोनिका शर्मा और मेराज अहमद की उपस्थिति में, अध्यक्ष डॉ. ब्राज़िल हाशमी के नेतृत्व में राष्ट्रगान से हुई। कार्यक्रम का संचालन अंतरराष्ट्रीय शायर नजीब इलाहाबादी ने किया।
अल हुदा एजुकेशनल सोसायटी के कन्वीनर इंतज़ार आब्दी और शफक़त अब्बास पाशा ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ, शॉल और मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।
मुशायरे में देश की एकता, अखंडता और शहीदों की कुर्बानियों को समर्पित रचनाओं से शायरों ने माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। ख्यातिप्राप्त शायरों और कवियों-फरमूद इलाहाबादी, शहंशाह सोनवी, मखदूम फूलपूरी, अशरफ लखनवी, किरदार ग़ाज़ीपुरी, नीलिमा मिश्रा, वंदना शुक्ला, मिस्बाह इलाहाबादी, शादाब बनारसी, सुहेल ग़ाज़ीपुरी, जावेद शोहरत आदि-ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया और खूब वाहवाही बटोरी।
मखदूम फूलपूरी ने क़ौमी एकता पर पढ़ा-
“दिलों-दिमाग़ में भर दे जो आग नफरत की,
कभी बच्चों को ऐसी किताब मत देना।”
कवयित्री नीलिमा मिश्रा ने समाज की स्वार्थपरता पर कटाक्ष करते हुए कहा-
“क्या बुरा है सही-सही कहना,
दिल्लगी हो तो दिल्लगी कहना।
हो जो मतलब तो लोग मिलते हैं,
ऐसे रिश्तों को मतलबी कहना।”
युवा शायरा मिस्बाह इलाहाबादी ने हालात-ए-वक्त पर पढ़ा-
“इश्क़ में होशियारी नहीं चाहिए,
नफरतों का पुजारी नहीं चाहिए।
प्यार को जो तिजारत समझे यहां,
प्यार का वो भिखारी नहीं चाहिए।”
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों को अल हुदा एजुकेशनल सोसायटी की ओर से सम्मानित किया गया। कोरोनाकाल में दिवंगतों के कफ़न-दफ़न में निःस्वार्थ योगदान देने वाले समाजसेवी शफक़त अब्बास पाशा को विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। कार्यक्रम में आसिफ उस्मानी, वज़ीर खां, एस.ए. खान, इफ्तेखार आलम, बाक़र नक़वी, हसन नक़वी, डॉ. मज़हर अब्बास, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, अफसर महमूद, अज़मत अब्बास, जैनुल अब्बास सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

