फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की सनसनीखेज घटना के बाद भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर ने इस घटना को राजनीतिक साजिश बताया। तंवर ने आरोप लगाया कि यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मिलीभगत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह केवल लोकतंत्र और संविधान पर नहीं, बल्कि 145 करोड़ भारतीयों पर सीधा हमला है। तंवर ने आरोपी वकील के खिलाफ देशद्रोह, एससी/एसटी एक्ट, अदालत की अवमानना और हत्या की कोशिश जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर-1 में हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।
60 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” के नारे लगाते हुए सीजेआई गवई की बेंच की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया, हालांकि जूता बेंच तक नहीं पहुंचा। सीजेआई गवई ने घटना को हल्के में लेते हुए कहा, “ऐसी चीजें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” वकील को बाद में दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया, लेकिन दिल्ली बार काउंसिल ने उसके प्रैक्टिस लाइसेंस को तत्काल निलंबित कर दिया। राकेश किशोर ने पूछताछ में बताया कि वह सीजेआई की खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति बहाली से जुड़ी याचिका पर की गई टिप्पणी से नाराज था, जहां सीजेआई ने इसे “प्रचार के लिए जनहित याचिका” कहा था।
तंवर का बयान: मनुवादी व्यवस्था का संविधान पर तमाचा
भीमसेना प्रमुख सतपाल तंवर ने शाम को जारी अपने प्रेस बयान में कहा— “यह केवल जूता फेंकने की घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश पर हमला है। मनुवादी ताकतें यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं कि एक दलित परिवार से आने वाला अंबेडकरवादी व्यक्ति भारत का मुख्य न्यायाधीश बने।” उन्होंने आगे कहा कि इस हमले के पीछे मोदी, शाह और भागवत की साजिश है। तंवर ने यह भी कहा कि योगी सरकार के अवैध बुलडोजर पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और कुछ कथा वाचकों के भड़काऊ बयानों ने भी इस माहौल को जन्म दिया है।
उन्होंने बताया कि सीजेआई गवई की माता ने आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में शामिल होने से इंकार कर दिया था, “संभव है यह घटना उसी वैचारिक विरोध का बदला हो,” उन्होंने कहा। कड़ी कार्रवाई की मांग तंवर ने आरोपी वकील पर देशद्रोह, एससी/एसटी एक्ट, अदालत की अवमानना, और हत्या के प्रयास जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की। उन्होंने कहा, “यह हमला सिर्फ सीजेआई पर नहीं, बल्कि संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के सपनों पर हमला है।” राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद यह घटना अब राजनीतिक रूप ले चुकी है। कांग्रेस और आप ने इसे “न्यायपालिका पर हमला” बताया, जबकि भाजपा ने सतपाल तंवर के आरोपों को “तुष्टिकरण की राजनीति” करार दिया है।
सोशल मीडिया पर #JusticeForGavai और #ManuvadiConspiracy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
सीजेआई गवई ने बाद में कहा, “मैं सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करता हूं। मेरी कोई भी टिप्पणी किसी की भावना आहत करने के लिए नहीं होती।”
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां जेड+ सुरक्षा वाले सीजेआई तक ऐसा प्रयास पहुंच सका। दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन सतपाल तंवर के आरोपों के बाद मामला जातीय और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।

