अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:
भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भोपाल के नामवर सपूत मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली की 98वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन और सेवाओं से नई पीढ़ी को अवगत कराने तथा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बरकतुल्लाह एजुकेशन सोसाइटी के तत्वावधान में एक भव्य सेमिनार का आयोजन बरकतुल्लाह पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल, भोपाल में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मौलाना मोहम्मद अंसार और क़ारी अब्दुस्सलाम क़ासमी की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ। बरकतुल्लाह पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने हम्द, नात और मौलाना को काव्यात्मक श्रद्धांजलि प्रस्तुत की। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा भोपाल एवं बाहर से आए अतिथियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही।

सोसाइटी के संस्थापक व अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली के जीवन व सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मौलाना ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए पूरी दुनिया का दौरा किया। उन्हें गुलाम देश में जीवन व्यतीत करना स्वीकार नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना जीवन प्रवास में बिताया और स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखी। उन्होंने देश से बाहर अंग्रेज़ों के विरुद्ध निर्वासित सरकार (Exile Government) की स्थापना की और उसमें भी राष्ट्रीय एकता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राजा महेन्द्र प्रताप को राष्ट्रपति बनाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में कुछ लोग अपना धर्म दूसरों पर थोपना चाहते हैं, जो देशहित के विरुद्ध है। पूरी दुनिया “वन नेशन थ्योरी” पर चल रही है और जमीअत उलमा-ए-हिंद के नेताओं ने भी भारत को इसी सिद्धांत की राह दिखाई थी। अफसोस की बात है कि मध्यप्रदेश सरकार ने इतने महान और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त स्वतंत्रता सेनानी को उनकी पुण्यतिथि पर याद नहीं किया।

प्रसिद्ध साहित्यिक व सामाजिक शख्सियत इक़बाल मसूद ने कहा कि मौलाना ने निर्वासित सरकार की स्थापना की, लेकिन वे स्वेच्छा से प्रवास में गए थे। उन्होंने गदर पार्टी की नींव रखी और अंग्रेज़ों के अत्याचारों को दुनिया के सामने उजागर किया। अंग्रेज़ स्वयं को शिक्षित और सभ्य बताते थे, लेकिन उनके शासन में अत्याचार व अन्याय चरम पर था। मौलाना का उद्देश्य इस दोहरे चरित्र को बेनकाब करना और पूरी दुनिया को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित करना था।
सेमिनार में समाजसेवी कामरेड शैलेंद्र शेली जी की पुस्तक “राग भोपाली” (मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली की जीवनी पर विशेष अंक) का विमोचन भी किया गया। साथ ही मौलाना की साहित्यिक, राजनीतिक, सामाजिक और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी सेवाओं पर आलेख प्रस्तुत किए गए। इसमें यह भी मांग की गई कि मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली के नाम पर राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा की जाए, कोई स्मारक स्थापित किया जाए और उनके जीवन एवं योगदान को मध्यप्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
कार्यक्रम को विशेष रूप से संबोधित करने वालों में मौलाना ज़िया उल हक़ खैराबादी , वरिष्ठ पत्रकार सुधीर सक्सेना, कामरेड शैलेंद्र शेली जी, डॉ. महेन्द्र शर्मा, बौद्ध धर्मगुरु भंते कुल भूषण जी, प्रो. आयशा कमाल, एडवोकेट शाहनवाज़ ख़ान, एडवोकेट, इबनूल हसन कासमी, शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन सोसाइटी के सचिव एडवोकेट मोहम्मद कलीम ने किया। कार्यक्रम की सफलता में हाजी मोहम्मद इमरान हारून, हाजी हनीफ अय्यूबी, मोहम्मद अहमद ख़ान, मोहम्मद ज़ुबैर, मुजाहिद मोहम्मद ख़ान, मौलाना राफ़ि अली, मौलाना शाकिर नदवी और मौलाना मोहम्मद अंसार का विशेष योगदान रहा।

