मप्र के निजी मेडिकल कॉलेजों में एन.आर.आई. कोटे से हो रहे प्रवेश में भ्रष्टाचार एवं धांधली का एनएसयूआई ने लगाया गंभीर आरोप | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने आज पत्रकारवार्ता कर मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में एम.बी.बी.एस., बी.डी.एस. तथा पीजी (एम.डी./एम.एस./एम.डी.एस.) कोर्सों में एन.आर.आई. कोटे से हो रहे प्रवेश में गम्भीर भ्रष्टाचार और धांधली का आरोप लगाया है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि शासन और निजी चिकित्सा महाविद्यालय एवं विवि के संचालकों की मिलीभगत से प्रतिवर्ष 800 से 1000 करोड़ रुपए की अवैध कमाई इस फर्जीवाड़े से की जा रही है। अवैध कमाई में से शिक्षा माफिया विभाग के बड़े अधिकारियों समेत विभागीय मंत्री को भी हिस्सा पहुंचाते हैं जिससे हर बार छात्रों और छात्र संगठनों की शिकायतों को दबा दिया जाता हैं इससे मध्यप्रदेश के गरीब और मेधावी छात्र-छात्राओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने 29 अगस्त को मुख्य सचिव समेत लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त को विस्तृत शिकायत भी की हैं।

मप्र के निजी मेडिकल कॉलेजों में एन.आर.आई. कोटे से हो रहे प्रवेश में भ्रष्टाचार एवं धांधली का एनएसयूआई ने लगाया गंभीर आरोप | New India Times


एन‌एसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि  मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में काउंसलिंग प्रक्रिया में जानबूझकर गड़बड़ी की जाती है। पैसे लेकर मनमाने ढंग से प्रवेश दिए जाते हैं म.प्र. शासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश (W.P. (Civil) No. 689/2017 दिनांक 22-08-2017) के विपरीत एन.आर.आई. की परिभाषा ही बदल डाली , निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेज पैसे लेकर छात्रों को नकली एन.आर.आई. सर्टिफिकेट उपलब्ध कराते हैं जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि केवल माता-पिता, सगे भाई-बहन, चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी ही स्पॉन्सर कर सकते हैं। लेकिन यहां कोई भी व्यक्ति पैसे लेकर स्पॉन्सर बन जाता है।


रवि परमार ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पॉन्सर को छात्र का पूर्व से ही “Ward/आश्रित” सिद्ध करना होगा और उसकी पढ़ाई का खर्च उठाना होगा। लेकिन म.प्र. में मात्र शपथ पत्र के आधार पर ही प्रवेश मिल जाता है। जबकि नियम के अनुसार स्पॉन्सर के ही बैंक अकाउंट से फीस का भुगतान करना चाहिए, लेकिन यहां छात्र या उसके परिवारजन ही फीस भरते हैं। इससे स्पष्ट है कि स्पॉन्सर नकली है। मध्य प्रदेश में NRI कोटे से प्रवेश लेने वाले छात्रों और उनके स्पॉन्सर के बैंक अकाउंट की जाँच की जाएगी तो फर्जीवाडा उजागर हो जाएगा , दूसरे राज्यों से 10वीं-12वीं पढ़े छात्रों को फर्जी मध्य प्रदेश का “मूल निवासी प्रमाण पत्र” बनवाकर मोटी रकम लेकर मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में प्रवेश दिया जा रहा है।जबकि नियमानुसार मध्यप्रदेश के मूल निवासी जो मध्यप्रदेश में रहकर ही अध्ययनरत थें उन्हें प्रवेश हेतु प्राथमिकता देनी हैं यदि सीटें रिक्त रह जाती हैं तब दूसरे राज्यों के छात्र छात्राओं को प्रवेश देना हैं । जिससे मध्य प्रदेश क मूलनिवास छात्रों का नुकसान हो रहा है ।

जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि फर्जी एन.आर.आई. प्रवेश के कारण मध्य प्रदेश के छात्रों जिसमे SC, ST, OBC, EWS वर्ग के मेधावी छात्रों को सीटें नहीं मिल पा रही हैं जो छात्रों के साथ अन्याय है । NEET-UG और NEET-PG (सहित NEET-MDS, NEET-BDS) की अखिल भारतीय काउंसलिंग (MCC) में भी स्पष्ट उल्लेख है कि एन.आर.आई. प्रवेश सुप्रीम कोर्ट आदेशानुसार ही होगा। लेकिन म.प्र. में इस नियम की एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं डीएमई द्वारा कहा गया कि एन.आर.आई. प्रमाण पत्र एंबेसी से सत्यापित होंगे , जबकि एंबेसी से सत्यापित होने के साथ ही नियम अनुसार सत्यापन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के प्राध्यपक/अधिकारी/काउंसलिंग प्रतिनिधि द्वारा होना चाहिए और सभी दस्तावेज वेबसाइट पर सार्वजनिक होने चाहिए परंतु निजी चिकित्सा महाविद्यालय और निजी विश्वविद्यालय को आर्थिक लाभ  पहुंचाने के लिए लेने के लिए ऐसा नहीं किया जा रहा हैं ‌।

विवेक त्रिपाठी ने कहा कि पीजी कोर्स में क्लिनिकल ब्रांच में एनआरआई सीटों में धांधली – मेडिकल कॉलेजों में एन.आर.आई. सीटें सिर्फ क्लिनिकल ब्रांच (जैसे डर्मेटोलॉजी, रेडियोलॉजी, मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, गायनी, जनरल सर्जरी आदि) जिनमे सबसे ज्यदा एडमिशन होते है उनमे ही एन.आर.आई. सीटें में रखी जाती हैं, ताकि ज्यादा पैसे वसूले जा सकें।
नॉन-क्लिनिकल ब्रांच (एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, फॉरेंसिक आदि) में में एनआरआई सीट निजी चिकित्सा महाविद्यालय और विवि खुद ही निर्धारित नहीं करवाते हैं जोकि नियमविरुद्ध है। जबकि PG कोर्स में एन.आर.आई. कोटे की सीटें ब्रांचवार विभाजित होना चाहिए लेकिन कॉलेज संचालको द्वारा PG कोर्स में एन.आर.आई. कोटा टोटल सीटो पर लागु कर एन.आर.आई. सीटें सिर्फ क्लिनिकल ब्रांच में बेची जा रही है , प्रति छात्र MBBS  में 1.5–2 करोड़ तथा PG (MD/MS/MDS) में लगभग 3 करोड़ रुपये तक वसूले जाते हैं।

रवि परमार ने कहा कि न्यायालय व राजपत्र का उल्लंघन – म.प्र. शासन के राजपत्र दिनांक 9 मार्च 2018 और MCC की नियम पुस्तिका में साफ-साफ सुप्रीम कोर्ट आदेश लागू करने की बात कही गई है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा। जो की सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना है एनएसयूआई की शिकायत के बाद डीएमई अधिकारी अरुणा कुमार ने एक समाचार पत्र में गलत तरीके से बताया कि एनआरआई प्रमाण पत्र का सत्यापन एंबेसी करेगी लेकिन ऐसा कोई आदेश पोर्टल पर अपलोड नही किया गया यह नियमों के विपरीत है। वास्तविकता यह है कि सत्यापन डीएमई द्वारा नियुक्त शासकीय प्रतिनिधियों से होना चाहिए और सभी दस्तावेज सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किए जाने चाहिए।

एनएसयूआई की मांगें
1. सभी पूर्व में एन.आर.आई. कोटे से प्रवेश लेने वाले छात्रों के दस्तावजो की जाँच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में STF से करवाई जाये ।
2. प्रवेशित छात्रों के दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के प्राध्यपक/अधिकारी/काउंसलिंग प्रतिनिधि से करवाया जाये और उन्हें सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
3 . दोषी निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेज प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
4. भविष्य में इस तरह की धांधली रोकने हेतु कड़े और पारदर्शी नियम लागू किए जाएं। ( जैसे कि महारास्ट्र कर्नाटक सरकार के है )

एनएसयूआई ने कहा कि यह घोटाला प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो एनएसयूआई छात्रहित में सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगा। छात्र हित में जरुरत पड़ने पर हाई कोर्ट और सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगे |

पत्रकारवार्ता में मुख्य रूप से मप्र कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार और जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर , गैर तकनीकी महाविद्यालय जिला प्रमुख आशीष शर्मा जिला उपाध्यक्ष अमित हाटिया लक्की चौबे  उपस्थित थे।