बुरहानी कमेटी द्वारा आयोजित नैचुरोपैथी शिविर में सौ से अधिक मरीजों का हुआ इलाज | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र)NIT:

बुरहानी बाग डेव्हलपमेंट कमेटी बड़वानी द्वारा तीन दिवसीय नेचुरोपैथी (प्राकृतिक चिकित्सा) का शिविर देवीसिंह मार्ग स्थित बुरहानी बाग में आयोजित किया गया। जिसमें सौ से अधिक मरीजों का इलाज किया गया।
शिविर में भोपाल के डॉक्टर नुरुद्दीन मलिक ने मरीजों का इलाज किया बुरहानी बाग में आयोजित इस शिविर में  कुक्षी, डही, जोबट, नानपुर, दाहोद, ठीकरी बड़वानी के मरीज भी इलाज के लिए आएं।

बुरहानी कमेटी द्वारा आयोजित नैचुरोपैथी शिविर में सौ से अधिक मरीजों का हुआ इलाज | New India Times


बुरहानी बाग डेव्हलपमेंट कमेटी और अंजुमन ए नजमी जमात के उमुर सेहत के तहत यह नेचुरोपैथी का शिविर 29 अगस्त से शुरू लगाया गया।डॉ नुरुद्दीन मलिक ने बताया कि वे 45 वर्ष से प्राकृतिक चिकित्सा नेचुरोपैथी से इलाज कर रहे हैं। और अभी तक वे भारत के सभी प्रमुख शहरों व कस्बों में शिविर लगाकर इलाज कर चुके हैं। बुरहानपुर में वे हर माह दरगाह ए हकीमी में जाकर इलाज करते हैं।
मलिक ने बताया कि नेचुरोपैथी पश्चिमी दर्शन पर आधारित चिकित्सा प्रणाली है। नेचुरोपैथी शब्द 1895 में जॉन शील द्वारा दिया गया, और इसे अमेरिका में बेनेडिक्ट लस्ट ने लोकप्रिय बनाया। प्राकृतिक चिकित्सा, शरीर की प्राण शक्ति एवं आंतरिक शारीरिक प्रक्रियाओं में सुधार लाकर खुद को स्वस्थ बनाने की स्वयं की क्षमता पर आधारित है। नॅचरोपॅथी का अर्थ प्राकृतिक चिकित्सा है, जो एक ऐसी चिकित्सा प्रणाली है जो रोगों के उपचार के लिए शरीर की अपनी प्राकृतिक उपचार शक्तियों और प्रकृति में पाए जाने वाले तत्वों जैसे जल, सूर्य, मिट्टी, फल, जड़ी-बूटियाँ आदि का उपयोग करती है। यह ऐसी उपचार पद्धति है जो व्यक्ति का संपूर्ण इलाज करती है, केवल लक्षणों का नहीं, बल्कि रोग के मूल कारण को खत्म करने पर जोर देती है और स्वस्थ जीवन-शैली अपनाने को प्रोत्साहित करती है।

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डॉ नुरुद्दीन मलिक ने बताया कि आज के दौर में इंसान का अनियमित खान-पान और जीवनशैली ही आधी बीमारी की वजह है । अगर हम नियमित वाकिंग और व्यायाम के साथ
खान-पान की आदत सुधार लें तो हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं।बुरहानी बाग कमेटी द्वारा आयोजित इस शिविर में मुस्तफा मलिक भोपाल, गुलाम  अली भारमल, हुसैनी रौनक , अहसान जाना, तैयब रौनक कौसर मंडवाड़ा,रियाज बेग,अली बिरला, मुदर रिज़वी,खुजेमा शेख, शेख़ इस्माइल खेतिया,मुफद्दल सैफी, शेख़ रियाज़ रिज़वी, युसुफ गांधी आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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