अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

भागलपुर जिला के कहलगांव व्यवहार न्यायालय में मध्यस्थता महाअभियान को लेकर मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई।
अनुमंडल विधिक सेवा समिति कहलगाँव के तत्वावधान में शनिवार को उच्च न्यायालय पटना के निर्देश के आलोक में चलाए जा रहे मध्यस्थता महाअभियान की सफलता को लेकर संबंधित अधिवक्ताओं के बीच एक संवाद सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित की गई।
उक्त कार्यक्रम में न्यायालय में चल रहे वैसे दीवानी मामले जिसमें कि सुलह की संभावना है को चिन्हित करते हुए मध्यस्थता के माध्यम से निपटारे हेतु जोर दिया गया।
आयोजित कार्यक्रम में अवर न्यायाधीश प्रथम सह अध्यक्ष अनुमंडल विधिक सेवा समिति के अखिलेश कुमार
ने उपस्थित अधिवक्ताओं को सम्बंधित विषय के बारे में जानकारी दी।
उन्होंन इस महाअभियान में जुड़कर अधिक से अधिक मामलों को चिन्हित कर उनके निपटारे हेतु विशेष प्रयास का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता (Mediation) विवादों के समाधान की एक स्वैच्छिक और अनौपचारिक प्रक्रिया है, जिसमें एक तटस्थ तीसरा पक्ष (मध्यस्थ) पक्षों को अपने मतभेदों को सुलझाने और आपसी सहमति से समाधान तक पहुँचने में मदद करता है, लेकिन मध्यस्थ स्वयं कोई निर्णय नहीं देता। यह अदालत जाने के विकल्प के बजाय, समय और लागत प्रभावी होने के साथ-साथ संबंधों को भी बनाए रखने का एक बेहतर तरीका है।
उच्च न्यायालय पटना के द्वारा राज्य भर के न्यायालयों में लंबित वादों के निपटारे हेतु एक सौ दिवसीय महाअभियान चलाया जा रहा है।
इस अवसर पर अवर न्यायाधीश तृतीय मो. तस्नीम कौशर ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने उपस्थित अधिवक्ता बंधुओं से इस महाअभियान में शामिल होकर अधिक से अधिक वादों के निपटारे की अपील की।
इस अवसर पर वरीय अधिवक्ता विजय मंडल, जय कुमार सिंह, देवेन्द्र पांडेय, जय शंकर सिंह, जय कुमार नारायण, मुक्तेश्वर साह, साधना झा, विनय कुमार, राम कुमार, रंजन तिवारी, चंदन, अनुपलाल वर्मा, सुमन सिंह, शत्रुघ्न शर्मा ईश्वर ठाकुर, प्रवीण के अलावा मनीष पांडेय उपस्थित थे।
