पीड़ित श्याम लाल साकेत की गुहार, क्या बदेरा पुलिस बनेगी कब्जाधारी की ढाल? | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

पीड़ित श्याम लाल साकेत की गुहार, क्या बदेरा पुलिस बनेगी कब्जाधारी की ढाल? | New India Times

मैहर जिले के बदेरा थाना क्षेत्र के ग्राम रिवारा के मझौली गांव में न्याय की आस में भटकता एक परिवार प्रशासनिक संवेदनहीनता का शिकार हो रहा है। श्याम लाल साकेत और उनका परिवार लगातार पड़ोसी द्वारा प्रताड़ना का सामना कर रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पड़ोसी पहले भी उनके ऊपर जानलेवा हमला कर चुका है और अब उन्हें डराकर, धमकाकर घर खाली कराना चाहता है। बदेरा थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे श्याम लाल को वहां न केवल घंटों बैठाए रखा जाता, बल्कि अंततः दबाव में आकर शिकायत वापस लेने को मजबूर कर दिया गया और मोबाइल छुड़ाकर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद कर देते है। यही नहीं, जब परिवार ने सीएम हेल्पलाइन और पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई, तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित परिवार अब रीवा आईजी से गुहार लगाकर न्याय की अंतिम उम्मीद लगाए बैठा है। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस ही एक पक्षीय होकर काम करने लगे और दोषियों को संरक्षण देने लगे, तो आम आदमी कहां जाए? गंभीर बात यह भी है कि जिस व्यक्ति पर दीवार बनाकर कब्जा करने का आरोप है,पीड़ित परिवार द्वारा मना करने पर गाली गलौज करता है, उसे बदेरा पुलिस खुलेआम संरक्षण दे रही है। क्या पुलिस का काम पीड़ित को ही दोषी साबित करना रह गया है? क्या बदेरा थाने की कार्यप्रणाली अब निजी चश्मे से लोगों को देखने तक सीमित हो गई है?यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठते गंभीर सवालों का प्रतीक बन चुका है।

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