जमशेद आलम, छिंदवाड़ा/भोपाल (मप्र), NIT:

केंद्र सरकार की अति-महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अंधत्व निवारण मिशन योजना, जो दीन-दुखियों के लिए मोतियाबिंद ऑपरेशन का सहारा है, परासिया में एक विशाल धोखाधड़ी और गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है। इस योजना के तहत कार्यरत लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर परासिया पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के संगीन आरोप लगे हैं।
छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने अपने साहसिक आरटीआई खुलासे से इस महाघोटाले की पोल खोली है। उनके द्वारा प्राप्त सत्यापित दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर परासिया ने पिछले 5 वर्षों में 17,958 ऑपरेशन का झूठा दावा कर सरकार से रुपए 3,59,16,000/- (लगभग 3.6 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि हड़प ली।
रिंकू रितेश चौरसिया की शिकायत पर, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री सहित देश के 14 प्रमुख विभागों को भेजा था, शासन-प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। लायंस क्लब द्वारा किए गए लगभग 18,000 मामलों में से 10% की रैंडम जांच करवाई गई, जिसके परिणाम चौंकाने वाले थे: जांचे गए मामलों में से मात्र 24% (428) ही सही पाए गए, जबकि शेष 76 फीसदी (1380) मामले पूरी तरह से फर्जी और असत्य निकले!
इस गंभीर धोखाधड़ी के आधार पर, लायंस क्लब संस्था और उसके 7 पदाधिकारियों के खिलाफ परासिया थाने में 10 जनवरी 2025 भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409 और 34 के तहत संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। यह प्रकरण वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, और मध्य प्रदेश शासन स्वयं एक पक्षकार के रूप में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे आश्चर्यजनक और निंदनीय पहलू यह है कि एक ओर जहां सरकार इस संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है, वहीं भाजपा से संबंधित नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय इस दागदार संस्था का खुल्लम-खुल्ला समर्थन कर रहे हैं। हाल ही में, विनोद मालवीय इस विवादित संस्था के एक कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी बनाई गई रील को फेसबुक पर साझा करते हुए यह दावा किया कि वे विषम परिस्थितियों में भी इस संस्था का सहयोग और साथ देते रहेंगे।
नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय का यह गैर-जिम्मेदाराना कदम उनके पद की गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एक जन-प्रतिनिधि, जो स्वयं शासन का हिस्सा है, उसका एक ऐसी संस्था का बेशर्मी से समर्थन करना जिसके खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य गंभीर आरोपों में सरकार स्वयं कानूनी कार्रवाई कर रही है, सीधे तौर पर सार्वजनिक विश्वास और पद की निष्पक्षता का अपमान है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ लोग भ्रष्टाचार के मामलों में भी संदिग्ध संस्थाओं को खुलेआम संरक्षण दे रहे हैं।
समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया के इस निडर और ऐतिहासिक खुलासे ने न केवल राष्ट्रीय अंधत्व निवारण मिशन में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार को उजागर किया है, बल्कि इसने जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

