केवलारी से पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा की खास रिपोर्ट:-
केवलारी-सिवनी (मप्र), NIT;
मामला केवलारी विधान सभा एवं केवलारी जनपद पंचायत के अंतर्गात आने वाली ग्राम पंचायत डोकररांजी का है, जहां पर दिनांक 21/12/2017 को शाम अंधेरा होने के बाद ग्राम पंचायत डोकररांजी सचिव -चंद्रकेशव नाग एवं सरपंच – सरमन मरावी द्वारा श्रीमती कचरों बाई पति सूम्म्मू जाति गौड़ आयु लगभग 55 वर्ष का मकान अतिक्रमण के नाम पर बिना पूर्व में सूचना दिये आग के हवाले कर दिया गया। आपको बता दें कि जिस समय पीड़ित के मकान पर दबंगों द्वारा आग लगाई जा रही थी उस समय मकान के अंदर उसका जरूरत का सरा समान रखा था जो की मकान के साथ ही जल कर राख हो गया। पीड़ित महिला ने इन दबंगों के सामने बहुत गिड़गिड़ाया रोया पर इन्हें जरा भी दया नहीं आई और मकान को आग के हवाले कर दिया गया, जिस वजह से अब पीड़ित दर दर भटकने पर मजबूर हो गई है।
इसके पहले भी दबंग सचिव सरपंच द्वारा दिनाँक 19/12/2017 को पीडिता के गेहूं को बुलडोज़र चला कर नष्ट कर दिया गया था। प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त घटना की शिकायत पीडिता द्वारा थाना केवलारी में की गई किन्तु यहां से दोषियों पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नही की गई। इसके बाद पीडिता द्वारा 100 डायल बुलवाया गया जिसमें समीपस्थ थाना धनौरा से पुलिस बल मौके पर पहुंच कर उनके द्वारा सभी के बयान दर्ज किये गाये पर अब तक कोई कार्यवाही नही की गई है।
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता एक बहुत ही गरीब भूमिहीन महिला है जो की ग्राम पंचायत डोकररांजी के ग्राम डोकररांजी में घास में दर्ज भूमि खसरा नंबर 370 में से 2.12 हेक्टर भूमि में विगत बीस वर्षो से अधिक समय से अनुपजाऊ भूमि को अपनी मेहनत से कृषि योग्य बनाया है, जिस पर पीड़िता अपना एवं अपने पूरे परिवार का बामुश्किल भरण पोषण करती है।
रातों-रात लगाई मकान में आग
इस भूमि में पीडिता ने अपने रहने के लिये एक छोटा एवं कच्चा झोपड़ा बना लिया था, जिसमें वह निवास करती थी, किंतु दबंगों ने उस गरीब मजबूर महिला के अशियाने को आग के हवाले करने में जरा भी देर नहीं की। ऐसा नही है ग्राम डोकररांजी मे घास की जमीन अन्य लोगों के कब्जे में नहीं है। आरोप है कि अन्य लोगों से सरपंच -सचिव को या तो समय समय पर पैसा मिलता है या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिस वजह से अन्य कब्जाधारियों पर ग्राम पंचायत सचिव- सरपंच द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जाती बल्कि उल्टा संरक्षण दिया जाता है। जबकि पीड़िता को कुछ महीने पूर्व तहसीलदार केवलारी द्वारा उक्त भूमि में कृषि करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उसे जुर्माना के रूप मे दो बार करके 1000 रुपये एवं 500 रुपये भी जमा करवा गया है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता द्वारा उस जमीन का पट्टा बनाने के लिये भी तहसीलदार केवलारी से निवेदन किया गया था, पर वहां से उस महिला को निराशा ही हाथ लगी। अब पीड़िता ने न्याय के लिये जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधिकक्षक महोदय से गुहार लगायी है, जहा से उसे उक्त मामले मे न्याय मिलने का पूरा भरोसा है। उसकी मांग है कि उसके हुये नुकसान की भरपाई सचिव -सरपंच द्वारा कराई जाये एवं जिम्मेदारों द्वारा उसके निवास के लिये उसे उचित स्थान प्रदान किया जाये एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए तकि भविष्य में किसी भी मजबूर एवं गरीब के साथ ऐसा ना हो। जिम्मेदार पदों पर बैठे जन प्रतिनिधियों को जो अपने आप को जनता के सेवक कहते नही थाकते उन्हें आगे आना चहिये एवं पीड़िता को न्याय दिलाना चाहिये, ताकी नियमों एवं कनून पर सभी का भरोसा बना रहे और आम जन अराजकता का महौल मसूस ना करे।
