विकास का अभ्यास करने के लिए चौड़ी की जा रही सड़के बनी जान के लिए खतरा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

विकास का अभ्यास करने के लिए चौड़ी की जा रही सड़के बनी जान के लिए खतरा | New India Times

एक जून की रात 10 बजे जलगांव जिले के जामनेर ब्लॉक में एक निजी बस सड़क पर अचानक से पलट गई। गारखेड़ा गांव के पास घटी इस घटना में कुछ यात्रियों को सामान्य चोटे आई है। भुसावल के NH 44 को राष्ट्रीय राजमार्ग 753 L से जोड़ने वाली सड़क के मुंह में सीमेंट कांक्रीट ठुसकर पर्यावरण की हत्या की जा रही है।  निर्माण के दौरान आए दिन हादसे हो रहे हैं। जामनेर सिटी के लोग तीन महीने पहले बिछाए कांक्रीट की धूल में रोज नहाकर बीमार पड़ रहे हैं। पूरे देश में बनाई जा रही सीमेंट कांक्रीट की सड़कों के पीछे न्यूयॉर्क की अदालत में घूसकांड के आरोपी गौतम अडानी की सीमेंट कंपनिया और मोदी सरकार के बीच 40% कमीशन की सेटिंग की खबरे है। जलगांव जिले में कहीं भी राजमार्गों के हादसे में पीड़ित मरीजों को इलाज़ के लिए 40 से 100 किलोमीटर दूर जलगांव भेजना पड़ता है।

महाराष्ट्र सरकार मे जामनेर ब्लॉक से गिरीश महाजन 11 साल से कैबिनेट मंत्री होने के बाद भी जामनेर के उपजिला अस्पताल को सभी सुविधाओ के साथ आधुनिक नहीं बनाया जा सका है। आज भी गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए जलगांव के सिविल अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। मंत्रियों के गृह नगरों को जोड़ने वाली सड़कों को चौड़ी कर उनके बीचोबीच चमचमाती स्ट्रीट लाइट लगवाने के अभ्यास को विकास बताकर पेश किया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं के बाद राज्य मे एक और ख़तरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

वो ये कि किसी भी दुर्घटना की खबर मिलने के तत्काल बाद शहरो से तमाशबीन युवाओं के जत्थे मोटर साइकिल पर सवार होकर उपद्रवी और बेकाबू भीड़ की शक्ल ले लेते है और घटना स्थल से लेकर अस्पताल तक प्रशासन के कामकाज में भारी रुकावट पैदा करते है। इस भीड़ को बढ़ावा देने के लिए बेकार बैठा रिटायर्ड अंकीलो का ग्रुप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना डेटा खपाता रहता है। धर्म की राजनीति ने बेरोजगारों को समाज सेवक, रुग्ण सेवक का नाम देकर दूसरो के फटे मे टांग डालने वाले तंत्र में बदल दिया है। टैक्स पेयर्स जनता मांग कर रही है कि जलगांव जिले में जितने भी कांक्रीट के रोड बनाए जा रहे हैं उनको शीघ्रता से पूरा कर लिया जाए क्योंकि दिन प्रतिदिन सूखे का खतरा गहरा होता जा रहा है।

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