हमें शमशान और कब्रिस्तान की शांति नहीं चाहिए: मनोज कुमार झा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

हमें शमशान और कब्रिस्तान की शांति नहीं चाहिए: मनोज कुमार झा | New India Times

राजकुमार शुक्ल की बिनती के बाद बापू बिहार के चंपारण गए में उसी बिनती का ध्वजवाहक हूं। भजमन प्यारे सीताराम की जगह बापू ने भजमन प्यारे राम रहीम, भजमन प्यारे कृष्ण करीम इस भजनों को अपनाया आज बापू ऐसा करते तो उनपर UAPA लग जाता। हमारा वजूद सह अस्तित्व के कारण है हमे शमशान और कब्रस्तान की शांति नही चाहिए ऐसा प्रतिपादन सांसद मनोज कुमार झा ने किया है। पुणे के कोथरुड मे गांधी स्मारक निधि युवक क्रांति दल की ओर से आयोजित तीन दिवसीय गांधी विचार साहित्य सम्मेलन के उद्घाटक के रूप मे मनोज बोल रहे थे। मंच पर सुरेश द्वादशीवार, कुमार सप्तर्षि तुषार गांधी, आनंद तेलतुंबडे मौजूद रहे। झा ने कहा मैं मार्क्सवादी विचारधारा से हूं लेकिन आज मार्क्स भी गांधी के पक्ष में होते। जिस राम के नाम पर सियासत की जा रही है उसे बापू के राम के साथ रखकर देखिए।

बीते वर्षों में जो हालातों का खराब होना हमने स्वीकार किया इस लिए आज पूरे देश में नोवाखली जैसे हालात है। संभल भागलपुर गुजरात दिल्ली आप कही भी गांधी को मारो वो मरेंगे नहीं। हर क़त्ल हर दंगा गांधी को बेचारीता का अहसास कराता था गांधी इस देश की आबोहवा का हिस्सा है। औरंगजेब बाबर तुग़लक़ के खिलाफ़ बोलकर सुर्खिया बटोरी जा रही है। गांधी हत्या का महिमामंडन करने वाला संसद की सीढ़ियां चढ़ता है। ऐतिहासिक पात्रों को आपस में लड़ाने का खेल चल रहा है ऐसे लोग भिन्नताओं को जश्न के तौर पर मनाते हैं इनका विरोध करो। जनता सोचती हुई चाहिए , भेड़ बकरियों की तरह नहीं , “हम कटेंगे नहीं हम बटेंगे नहीं”।

By nit

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