महाराष्ट्र में जंगलराज: केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे की बेटी के साथ गुंडों ने की छेड़खानी | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में जंगलराज: केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे की बेटी के साथ गुंडों ने की छेड़खानी | New India Times

बिहार में लालू प्रसाद यादव और समाजवादी विचारों पर हमला करने के लिए बीजेपी की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाला जंगलराज नाम का शब्द कमंडल नाम की OBC आरक्षण विरोधी साज़िश से आया है। देश में कानून व्यवस्था के विषय में मणिपुर के बाद गंभीर हालातों की ओर बढ़ने वाला दूसरा राज्य महाराष्ट्र है। कुछ दिन पहले कुछ छिछोरे गुंडों ने एक मेला क्षेत्र में केंद्रीय खेल युवा कल्याण मंत्री रक्षा खडसे की बेटी के साथ छेड़खानी करी। इस घटना ने देश विदेश में विश्वगुरु भारत और गतिमान महाराष्ट्र की घटिया कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। महाराष्ट्र में महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं मान रही हैं। RSS के दबाव के कारण मुख्यमंत्री बनाए गए देवेन्द्र फडणवीस महाराष्ट्र के सबसे कमजोर गृह मंत्री होने का कीर्तिमान बनाने जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री खडसे की बेटी को सरकारी सुरक्षा के बीच छेड़ने वाले सभी आरोपी शिवसेना (शिंदे) के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। वारदात में गुंडों ने खडसे की बेटी की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी के साथ मारपीट की। रक्षा खडसे को स्वयं मुक्ताई नगर पुलिस स्टेशन पहुंचकर गुंडों पर कार्रवाई करने की मांग करनी पड़ी। पुलिस ने अनिकेत भोई, सचिन पालवे, पीयूष भोई, सोहम कोली, अनूज पाटील, किरण माली कुल सात लोगो पर फौजदारी दायर कर दी है। महाराष्ट्र में महिलाओं की गरिमा पर लगातार हो रहे हमले मनुस्मृति नाम की किताब में दर्ज प्रतिगामी सड़ीगली सोच को अमल में लाने का छुपा एजेंडा तो नहीं है ? संसद में पेश National Crime Record Bureau Riport  में महाराष्ट्र के कानून व्यवस्था की रैंकिंग रुपए की तुलना में डॉलर जैसी धड़ाम से गिर गई है।

सत्र बेकार”शक्ति”हीन सरकार: उद्धव ठाकरे सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए शक्ति कानून का ड्राफ्ट बनाया सदन में पेश किया।शिंदे और अब फडणवीस सरकार ने इस ड्राफ्ट को आज तक कानून में तब्दील नहीं कराया है। पुण्यप्रिय और धार्मिक जनता ने विधायिका को कमजोर कर दिया है। कार्यपालिकाएं पूंजीवाद के हाथो की कठपुतली बन चुकी है। महाराष्ट्र को ऐसे गृह मंत्री की प्रतिक्षा है जो एकछत्र राजनीत के प्रभाव के लिए बिगाड़ी गई कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने का ईमानदार प्रयास करें।

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