विदेश में देसी कंपनियों ने किया महाराष्ट्र के लिए निवेश, सरकार ने जलगांव को दिखाया ठेंगा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

विदेश में देसी कंपनियों ने किया महाराष्ट्र के लिए निवेश, सरकार ने जलगांव को दिखाया ठेंगा | New India Times

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित world Economic Forum मे भारत की 61 कंपनियों में से 51 ने महाराष्ट्र में औद्योगिक निवेश करने संबंधी 15 लाख करोड़ रुपए के 54 करार किए हैं। करार सफ़ल हुए तो रत्नागिरी पालघर रायगढ़ पुणे औरंगाबाद गढ़चिरौली इन जिलों में भविष्य में कुछ कारखाने लग सकते हैं। उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव धूलिया नंदूरबार में एक भी प्रोजेक्ट का करार करवाने में फडणवीस सरकार के चारों कैबिनेट मंत्री फेल हो चुके हैं। जमीन , पानी , बिजली , सड़क , यातायात जैसी ठीकठाक सेवाओं के बावजूद भी खानदेश को ठेंगा क्यों  दिखाया गया? गुलाबराव पाटील गिरीश महाजन इन दोनों में से एक ने 2014-2024 इस एक दशक में जलगांव जिले में सुई बनाने तक का भी कारखाना नहीं लगवाया है। 2012 में पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा जलगांव में मंजूर कराया गया टेक्सटाइल पार्क अमरावती को शिफ्ट कर दिया गया।

विकास के नाम पर सिर्फ NH 753 F फोरलेन सड़क बनाई जा सकी। विधानसभा चुनावों में बेरोजगारी मुद्दा बनता दिखा तो बीजेपी ने चुनिंदा लड़को को जर्मनी में रोजगार देने के अवसर के नाम पर दिहाड़ी मजदूरी देने की मुहिम चलाई। वन नेशन वन इलेक्शन के गर्व उत्सव में मस्त बीजेपी ने विधानसभा के चुनाव करवा लिए तो बेरोजगारों को अमरीका में रोजगार देने का वादा किया जाएगा। सोशल मीडिया पर देवेन्द्र फडणवीस की बर्फ़बारी में सैर सपाटे की तस्वीरे देखने के साथ दावोस में किए गए Memorandum of understanding’s को ठीक से पढ़िए। आपको रोजगार और नौकरी (सरकारी) के बीच का भेद समझने में आसानी होगी।जलगांव के वोटर अपने बेरोजगार बच्चों के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके जिले में सार्वजनिक रूप से कारखाने खड़े किए जाएं।

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