महाविकास आघाड़ी की पंचसूत्री से बिजली गुल, जनता को सहने पड़ेंगे भुगतना के झटके | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाविकास आघाड़ी की पंचसूत्री से बिजली गुल, जनता को सहने पड़ेंगे भुगतना के झटके | New India Times

शिवसेना NCP इन प्रादेशिक दलों के साथ उनके विधायको ने करी गद्दारी , मराठी माणुस की भाषाई अस्मिता , महाराष्ट्र धर्म किसान जवान और स्वाभिमान के मुद्दों पर महाराष्ट्र में विधानसभा का चुनाव लड़ रही कांग्रेस प्रणीत महाविकास आघाड़ी की पंचसूत्री बिजली के अभाव से अंधेरे में खो गई है। आघाड़ी ने अपने मेनिफेस्टो में बिजली के आसमान छूते दरों को लेकर कोई बात नहीं की है। महाराष्ट्र की जनता को सबसे महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। घरेलू ग्राहकों को 0 से 100 तक 10 रुपए प्रती यूनिट के रेट पर बिल चार्ज किया जाता है।

महाविकास आघाड़ी की पंचसूत्री से बिजली गुल, जनता को सहने पड़ेंगे भुगतना के झटके | New India Times

100-200 , 200-300 इस प्रकार से यूनिट के रेट मांग के अनुरूप बढ़ते जाते हैं। 2019 कोरोना के छह महीनों में अंधाधुंध बिजली बिल के आंकलन को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार और उनके कांग्रेसी मंत्री नितिन राउत का जनता को बेहद खराब अनुभव है। 2019 के अपने वचनपत्र में शिवसेना ने घरेलू ग्राहूको को 0 से 100 यूनिट तक फ्री बिजली देने का वादा किया था जिससे उद्धव की सेना मुकर गई। महाराष्ट्र फ्री बिजली नहीं चाहता बल्कि प्रती यूनिट रेट हाफ करने कि मांग कर रहा है। बिजली क्षेत्र के निजीकरण संबंधी गौतम अदानी के साथ हजारों करोड़ रुपए के करार करने वाली बीजेपी से जनता को कतई कोई अपेक्षा नहीं है।

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बिजली क्षेत्र के विषय पर NCP चीफ़ शरद पवार और गौतम अदानी की तीन चार बैठकें हो चुकी है पर चर्चा बाहर नहीं आई। महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है सरकार मान्य प्रायवेट सेतू (आर्थिक लुट) सुविधा केंद्र जहां निवासी प्रमाणपत्र निकालने के लिए भी गरीब आदमी को 200 रुपए गिनने पड़ते हैं। जनता चाहती है कि सारे सेतू सुविधा हटाकर पहले की तरह तहसील कार्यालयों में “एक खिड़की योजना” को बहाल किया जाए। कल्याणकारी जन संकल्पों को पूरा करना महाराष्ट्र जैसी विकसित अर्थव्यवस्था के लिए नामुमकिन बात इस लिए नहीं है क्योंकि प्रदेश की GDP का आकार बड़ा है। सोमवार 11 नवंबर को शरद पवार चुनावी दौरे के लिए जलगांव पधार रहे हैं महंगी बिजली के विषय पर पवार क्या कहते हैं इसे सुनने के लिए महाराष्ट्र की जनता दिल थामकर बैठी है।

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