कैमोर में बीमारी में इजाफा, टीबी से ग्रसित हैं ग्रामीण, एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट ग्रामीणों की मदद करने के बजाए प्रशासनिक अधिकारियों को मैनेज करने में है व्यस्त | New India Times

शेरा मिश्रा/अविनाश द्विवेदी, कटनी (मप्र), NIT; ​कैमोर में बीमारी में इजाफा, टीबी से ग्रसित हैं ग्रामीण, एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट ग्रामीणों की मदद करने के बजाए प्रशासनिक अधिकारियों को मैनेज करने में है व्यस्त | New India Timesकटनी जिला प्रशासन के अंतर्गत औद्योगिक नगरी कैमोर क्षेत्र में एसीसी सीमेंट प्लांट की वजह से बीमारियों में इजाफा होता जा रहा है। देखा जा रहा है की इन दिनों बडारी, महगांव, अमेंहटा में टीबी के मरीजों में बढोत्तरी हो रही है। ​कैमोर में बीमारी में इजाफा, टीबी से ग्रसित हैं ग्रामीण, एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट ग्रामीणों की मदद करने के बजाए प्रशासनिक अधिकारियों को मैनेज करने में है व्यस्त | New India Timesस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार एसीसी सीमेंट प्लांट के कन्वेयर बेल्ट से लगे हुए गावों की वजह से लोगों को टीबी जैसी गम्भीर बीमारी हो रही है। किन्तु इस प्रदूषण से बचने के उपाय नहीं किये जा रहे हैं। एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट ग्रामीणों को बचाने या व्यवस्था मुहैया कराने के बजाय सत्ता पक्ष के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को मैनेज करने में लगे हुए हैं, जबकि एसीसी मैनेजमेंट कटनी जिला कलेक्टर को अपनी इस हरकत में शामिल नही कर सके। शेष अधिकारी भले ही लोभ वस एसीसी के गुलाम हो गए हों किन्तु आज भी कलेक्टर कटनी अपनी इमानदारी में अडिग हैं। जिसका खुला प्रमाण देखा जा सकता है कि एसीसी की खदानों को आज भी कलेक्टर कटनी ने स्वीकृति नहीं दी है,  हालांकि एसीसी कलेक्टर की आखों में धूल झोंक कर स्थानीय अधिकारियों को अपने पक्ष में कर इन खदानों में अवैध उत्खनन कर रही है। इस मामले में एसडीएम को जांच करनी चाहिए। कलेक्टर के आदेश की अवहेलना करने वालों पर सख्ती से पेश आना चाहिए और अपने आला अधिकारी के पद पर दाग लगाने वाले अधिकारीयों के खिलाफ अपराध दर्ज करा देना चाहिए। लेकिन एसडीएम महोदय न जाने किस राजनीतिक दबाव में अपने विभाग और अपने आला अधिकारी की इज्जत दाव पर लगा रहे हैं। कटनी कलेक्टर महोदय ने विगत दिनों एसीसी सीमेंट प्लांट हेड सुमित चढ्ढा से मुलाकात तक नहीं की थी। ​कैमोर में बीमारी में इजाफा, टीबी से ग्रसित हैं ग्रामीण, एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट ग्रामीणों की मदद करने के बजाए प्रशासनिक अधिकारियों को मैनेज करने में है व्यस्त | New India Timesबताया जा रहा है कि क्षेत्र का शोषण करने वाले अधिकारीयों को कलेक्टर कतई पसंद नही करते हैं। प्लांट हैड कलेक्टर से मुलाकात करने तो गए लेकिन  मुलाकात के बिना ही वापस आना पड़ा। कलेक्टर महोदय के इस सराहनीय बर्ताव की चर्चा जब आम हुई तो कैमोर क्षेत्र में कलेक्टर की वाहवाही का नजारा देखा गया। जिससे आक्रोशित होकर प्लांट हेड सुमित चढ्ढा ने कलेक्टर की शिकायत मंत्री महोदय से कर स्थानांतरण की बात कही लेकिन वहाँ भी प्लांट हेड को नाकामी हासिल हुई। मंत्री जी ने कलेक्टर के विरोध में सुनना पसंद नही किया और प्लांट हैड को खरी खोटी बातों का सामना भी करना पडा। 

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पहली बार ऐसा कोई प्लांट हेड आया है जो क्षेत्र में सुधार लाने के बजाय नेताओं अधिकारीयों को मैनेज करने में मसरूफ़ है और जो इस खरीदी में शामिल नहीं होते तो उनके स्थांतरण कराने के भी प्रयास करता है। कलेक्टर कटनी से क्षेत्र वासी अपेक्षा करते हैं कि कैमोर क्षेत्र में बढ रहे प्रदूषण की रोकथाम करेंगे तथा जांच कर उपयुक्त कार्यवाही करेंगे। इस कार्य से जहां कलेक्टर की वाहवाही होगी वहीं शासन पर लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।

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