सीट बचाने, जीतने और पाने के चक्कर में गांव-गांव की खाक छान रहे नेता, कठिन दौर से गुज़र रहा है सोशल मीडिया का दर्शक | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सीट बचाने, जीतने और पाने के चक्कर में गांव-गांव की खाक छान रहे नेता, कठिन दौर से गुज़र रहा है सोशल मीडिया का दर्शक | New India Times

मराठा आरक्षण आंदोलन में देवेन्द्र फडणवीस के खास मित्र के रूप में मनोज जरांगे से बार-बार संवाद स्थापित करने वाले भाजपा नेता गिरीश महाजन का निर्वाचन क्षेत्र जामनेर तब सुर्खियों में आया जब जरांगे ने महाजन को हराने का ओपन चैलेंज किया। छह टर्म के विधायक महाजन के खिलाफ़ NCP (शरदचंद्र पवार) को भाजपा के पूर्व नेता दिलीप खोड़पे जैसा तगड़ा प्रत्याशी मिल गया है। पार्टी प्रमुख जयंत पाटिल ने जामनेर में आ कर हजारों लोगों के सामने दिलीप खोड़पे का टिकट घोषित किया। जवाब में भाजपा ने इवेंट मैनेजमेंट की धार इस कदर तेज़ कर दी कि राजनीत के हर कोने को कृत्रिमता से भर दिया गया है।

दिलीप खोड़पे जो कि पुराने भाजपाई है और समाज के हर जाती धर्म मे काफ़ी लोकप्रिय है उन्हें जरांगे फैक्टर के सहयोग से ब्लॉक के प्रत्येक बूथ का कुशल प्रबंधन करना पड़ेगा। भाजपा को अपनी सीट बचानी है, दिलीप खोड़पे को सीट जितनी है और तीसरा भीड़ू है जिसे यह सीट अपने पार्टी चिन्ह पर लड़नी है। महायुति और महाआघाड़ी में इसी तीसरे पक्ष के नेता गांव-गांव की खाक छान रहे हैं। किसी यू-ट्यूबर पत्रकार की तरह गोबर के ढेर के पास खड़े रहकर स्वच्छता, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ की दुर्दशा पर लच्छेदार भाषण देकर सरकार के मंत्रीयों विधायकों को जमकर कोस रहे हैं। यह वो लोग हैं जो सत्ता के डर से या फिर सत्ता से मिलने वाले लाभ के कारण गूंगे बहरे बने बैठे थे।

अवसरवादिता में छुपी नेताओं की इस प्रकार की राजकीय लालसा महाराष्ट्र के सभी 288 सीटों पर कम अधिक पैमाने पर देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया का दर्शक कठिन परिस्थिती से गुजर रहा है। गांव के गरीब लोग ऐसे नेताओं से मुखातिब हो रहे हैं जिनको उन्होंने बीते कई दशकों में कभी अपने आसपास भी नहीं देखा। महाराष्ट्र के वर्तमान राजनीतिक वातावरण में अपना सुनहरा भविष्य तलाशने वाला तीसरा पक्ष युति और आघाड़ी इन दोनों के लिए सिरदर्द बनकर उभर सकता है।

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