सलमान चिश्ती, रायबरेली (यूपी), NIT;
पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्ल.) की यौमे विलादत यानी ईद मीलादुन्नबी की तैयारी मुस्लिम इलाकों में जोरों से शुरू हो चुकी है। मस्जिदों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। जगह-जगह हरे झंडे लग चुके हैं। झंडियों से सजावट हो रही है। खीरों कस्बे में विशाल गेट बनाया जा रहा है, वहीं इस्लामिक झंडे व बैनरों से सजी दुकानें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मुसलमानों में बारह रबी अव्वल (ईद मीलादुन्नबी) त्यौहार काफी अहम है। 2 दिसंबर को निकलने वाला जुलूस-ए-मुहम्मदी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे इसकी तैयारी चरम पर है।
बारावफात पैगंबर मुहम्मद साहब (सल्ल.) के दुनिया से रुख्सत होने का दिन भी है। इस दिन लोग नमाज पढ़ते हैं और पैगंबर साहब के आदर्शों को याद करते हैं। पैगंबर मुहम्मद पूरी दुनिया के लिए अल्लाह की ओर से रहमत और बरकत बनाकर भेजे गए थे।
उन्होंने लोगों को सच्चाई, भलाई, नेकी, सेवा और भाईचारे की शिक्षा दी। कहा जाता है कि रुख्सत से पहले पैगंबर साहब बारह दिनों तक अस्वस्थ रहे। इसके बाद उनका इंतकाल हो गया था, इसलिए उनकी याद में बारावफात मनाया जाता है।
यह दिन इबादत, दान-पुण्य, भलाई और पैगंबर साहब की बताई नेकियों पर मनन करने और उन्हें जीवन में उतारने का दिन है। इस मौके पर लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ते हैं और दुआएं मांगते हैं।खीरों कस्बे में स्थिर बाबा फ़तेह शहीद शाह रहमतुल्लाह अलैहे के दरगाह शरीफ है। जो सैकड़ों साल पुरानी है। यहां पर जो भी आता है खाली हाथ और मायूस होकर नहीं जाता है यहां पर हर साल की तरह इस साल भी बारह रबीउल अव्वल (ईद मीलादुन्नबी) बहुत ही धूमधाम से लोग मानते है। बारह रबीउल अव्वल शरीफ की तैयारी बहुत ही तेजी से चल रही है। बाबा फ़तेह शहीद शाह रहमतुल्लाह अलैहे दरगाह शरीफ पर हर बृहस्पतिवार को बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की दुआ मांगते है।

Masha Allah bhai