मकसूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT;
इस वर्ष जिले में बडे पैमाने पर कपास की फसल पर रोगों की मार और कपास पर इल्लियों के प्रकोप होने से कपास फसल बर्बाद हो चुकी है, यह प्रतिबंधित बोगस बीजों और प्रमाणित बीजों में बरती गयी लापरवाही का नतीजा है। इसमें बीज कंपनीयों की नीति और सरकार की भूमिका उजागर होना जरूरी है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों पर यह नौबत क्यों आयी, यह सब उजागर करने के लिए सरकार को खुद पहल कर सीबीआई जांच करवाने की मांग शेतकरी वारकी संगठन के जिल्हाध्यक्ष सिकंदर शाह ने की. विश्रामभवन में आयोजित पत्रकार परिषद में की है।
उन्होंने प्रश्न किया कि इस वर्ष कपास में इल्लीयां कैसे आयीं? उन्होंने कहा कि बडे पैमाने पर बोलगार्ड, ब्रम्हा कंपनियों के प्रमाणीत बीज बोए गए, इनकी सभी वैराइटी प्रमाणित होने के बावजूद इल्लीयों की मार पडी।
उन्होंने बताया की कंपनी के बीजो पर सवाल और विवाद उठने के बाद इसका देश में बीज बिक्री का 2012 में करार समाप्त हो चुका है। यह कंपनी अब भारत से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसकी तकनीक के बीज अब भी इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। जिन किसानों के 60 हजार रूपये खर्च किए उन्हें उत्पाद केवल 40 हजार का हो रहा है ऐसी बात भी उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में की है।

लवकर शोध करा की आम्ही आहत्मात्या करू . पहिलेच निसर्ग साथ नाही द्यायला वरून बियांन असं निघालं तर तुम्हीचं सांगा आम्ही काय करू. ज्या भरवशावर हा देश चालला आहे त्याचाच जर जिव घ्याल तर या देशाच काय होइल जर तुम्हाला या समस्येचे निवारण करता येत नसेल तर तुम्ही शेती करा आम्ही पाहतो ते. नंतर तुम्हाला समजलं की कशाला म्हणतात शेती आणि काय असतात समस्या. हा देश जर कृषी प्रधान आहे तर पहिले शेती का नाही .