नई संहिताओं का जनजागरण आरंभ, राज्य सरकारों को सुधार के संवैधानिक अधिकार | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नई संहिताओं का जनजागरण आरंभ, राज्य सरकारों को सुधार के संवैधानिक अधिकार | New India Times

पूर्ववर्ती नरेन्द्र मोदी और वर्तमान NDA 1.0 सरकार के कार्यकाल में भारत में कानून से संबंधित नई संहिताएं एक जुलाई से लागू हो चुकी है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम इन टाइटल से सजे नए प्रावधान और उनके के तहत होने वाले बदलावों में खुद को और जनता को ढालना पुलिस और न्यायालयों के लिए किसी चुनौती से कम नही है। इस काम के लिए लीगल संस्थाओं को कानून की समझ रखने वाले मीडिया की सहायता मिलना शुरू हो गई है।

नई संहिताओं का जनजागरण आरंभ, राज्य सरकारों को सुधार के संवैधानिक अधिकार | New India Times

जलगांव जिला पुलिस की ओर से प्रत्येक ब्लॉक में थाना प्रभारियों ने पत्रकारों के माध्यम से जनसंवाद प्रक्रिया आरंभ कर दी है। VVIP ब्लॉक जामनेर में भारतीय न्याय संहिता का पहला मामला हत्या के अपराध में दर्ज़ हुआ है। थाना प्रभारी किरण शिंदे ने ब्रिफिंग कर इसकी जानकारी दी और कहा कि नई संहिता में कुछ पुरानी धाराओं के नंबर्स और सजा का प्रावधान बदला है। शिकायत लेकर कोतवाली आने वाली जनता का आग्रह होता है की अमुक इस धारा के अनुसार मामला कलमबद्ध करे लेकिन अब उन धाराओं के नंबर बदल चुके हैं। इसी लिए हम जनता तक नई संहिता की प्राथमिक जानकारी पहुंचाना चाहते हैं ताकि लोग किसी गलतफहमी के शिकार न हो।

शिंदे ने कहा कि कर्मचारी अधिकारियों का प्रशिक्षण सम्पन्न हो चुका है अब बस जनता को अवगत कराना है। विदित हो कि नई संहिता को पुलिस स्टेट करार देनेवाले विपक्ष के कटाक्ष को तत्कालीन मोदी सरकार ने ” Give Justice Not Punishment ” से जवाब दिया था। बिना बहस केवल पांच घंटे के भीतर लोकसभा में पारित किए गए उक्त बिलों पर विपक्ष से कोई मशवरा नहीं किया गया। जब ये बिल संसद से पास हुए तब 140 सांसदों को निलंबित कर सदन से बाहर निकाल दिया गया था। नई संहिता ने पुलिस को अधिक ताकतवर और आम नागरिक के अधिकारों को कमजोर बनाया है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं फाइल की जा चुकी है। भारत गणराज्य के संघीय ढांचे में हर राज्य की विधानसभा को यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वह केंद्र सरकार द्वारा संशोधित इन संहिताओं में संशोधन और सुधार कर सकते हैं।

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