प्रीपेड मीटर के खिलाफ़ सड़क पर उतरे लोग, उद्धव ठाकरे सरकार के समय बिजली को लेकर काफ़ी बुरे अनुभवो से गुजरे है उपभोक्ता | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

प्रीपेड बिजली मीटर के विरोध में ऊर्जा मंत्री देवेन्द्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में आम जनता सड़क पर उतर आई। ED , CBI की मदत लेकर महाराष्ट्र में जबरन बनाई गई भाजपा सरकार के DCM देवेन्द्र फडणवीस ने गौतम अडानी को स्मार्ट बिजली मीटर का करीब 13 हजार 888 करोड़ का टेंडर देने का फैसला किया है। महाराष्ट्र में 2 करोड़ 65 लाख मीटर लगाने के लिए 39 हजार 65 लाख रुपए खर्च होंगे। 24 मई 2024 की अपनी रिपोर्ट में हमने बताया था कि प्रदेश में किस प्रकार से प्रीपेड मीटर के टेंडर जारी किए गए है। अगस्त 2023 में ऊर्जा मंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कुछ टेंडर जारी कर दिए हैं।

गौतम अडानी को जारी टेंडर में बारामती जोन का 3300 करोड़ रुपया रिलीज़ किया जा चुका है। राज्य में दो लाख स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर बिठाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर सिस्टम ग्राहक संरक्षण कानून से बाहर होगा। इस सिस्टम से बिजली उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण होगा और बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की कटौती की जाएगी। सितंबर में राज्य विधानसभा के आम चुनाव होने है आम लोग विपक्ष बनकर बिना किसी राजकीय बैनर के प्रीपेड मीटर विरोधी आंदोलन में कूद पड़े है। आने वाले समय में यह आंदोलन विशाल रूप धारण कर सकता है।

भारत में महाराष्ट्र एक मात्र ऐसा राज्य है जहां के लोगो को सबसे महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। 2019 में सत्ता में आई उद्धव ठाकरे सरकार ने कोरोना काल के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिलो में सबसिडी देने के बजाय अतिरिक्त मनमाने बिल वसूले। इतना हि नहीं सरकारी परिवहन निगम बंद होने के बाद भी राज्य की ST कैंटीनों से जबरन किराया लिया गया। 100 यूनिट तक बिजली फ्री देने के अपने वादे को शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सत्ता में आने के बाद भूल चुकी थी।

शिंदे सरकार आने के बाद प्रीपेड मीटर को लेकर MVA सदन में चुप रहा, गौतम अडानी NCP चीफ़ शरद पवार से लगातार मिलते रहे हैं। बिजली सेक्टर में हो रहे लाखों करोड़ रुपए के आर्थिक व्यवहारों के बारे में भाजपा और MVA में शामिल तीनों दलों की नीति और राजनीति में जनता को कोई फ़र्क नज़र नहीं आ रहा है। जो पार्टी जनता को महंगी बिजली से निजाद दिलाएगी, प्रीपेड मीटर को रद्द करेगी उसके प्रति मतदाता अनुकूल हो सकते है। आने वाले चुनाव में बिजली का मुद्दा भाजपा और विपक्ष दोनों के लिए सिरदर्द बनेगा। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने महाराष्ट्र में दस्तक दे दी तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।


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