M2 फैक्टर से भाजपा की दोनों सीटे खतरे में, गृहनगर से बाहर नहीं निकले गिरीश महाजन | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

M2 फैक्टर से भाजपा की दोनों सीटे खतरे में, गृहनगर से बाहर नहीं निकले गिरीश महाजन | New India Times

उद्धव ठाकरे को खुली चुनौती देने वाले भाजपा नेता गिरीश महाजन के अपने जलगांव में शिवसेना के करण पवार भाजपा को क्लीन बोल्ड करते नज़र आ रहे हैं। इस सीट के लिए सवा प्रतिशत इजाफे के साथ 57% मतदान हुआ। मराठा समुदाय के प्रभाव वाले जलगांव संसदीय क्षेत्र से करण पवार प्रमुख कुनबी मराठा प्रत्याशी है। मनोज जरांगे के नेतृत्व में जारी मराठा आरक्षण आंदोलन।  2014 से अब तक राज्य मंत्री परिषद में मराठा नेताओं को किनारे कर गुर्जर समाज के दो विधायकों को दिए अवसर के कारण मराठा समाज में असंतोष है। भाजपा की ओर से साधे गए राजनीतिक और सामाजिक असंतुलन का सीधा असर यहां देखा जा सकता है।

M2 फैक्टर से भाजपा की दोनों सीटे खतरे में, गृहनगर से बाहर नहीं निकले गिरीश महाजन | New India Times

रावेर सीट को लेकर 7 मई की रिपोर्ट में हमने कहा था कि अगर 65% या उससे अधिक मतदान हुआ तो रावेर में चौंकाने वाला नतीजा आएगा। रावेर में 2019 के मुकाबले 63.25% मतदान हुआ है। कुल 18 लाख 12 हजार वोटरों में से 11 लाख 34 हजार ने मतदान किया। क्षेत्र में 24% वोट मराठा और 14% मुस्लिम समाज के हैं। मराठा – मुस्लिम समाज ने एकमुश्त हो कर परिवर्तन के पक्ष में वोट किया है। कांटे की टक्कर में जितने वाले प्रत्याशी का लीड 40 से 50 हजार के अंदर रह सकता है। भाजपा की ओर से तीसरे टर्म के लिए अभिलाषी रक्षा खडसे के खिलाफ़ श्रीराम पाटील NCP (SP) मैदान में हैं। कमोबेश पूरे महाराष्ट्र में मतदाताओं की ओर से M2 फैक्टर को अमल में लाया जाता हुआ देखा जा रहा है। वंचित बहुजन आघाड़ी जो वोट लेगी उसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा।

जामनेर में रहे महाजन- ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक किसी भी संस्था का चुनाव हो चुनाव आयोग की ओर से नतीजे आने से पहले भाजपा के पक्ष में नतीजे घोषित करने वाले एकमात्र नेता के रूप में गिरीश महाजन की पहचान है। मतदान के दिन महाजन दिनभर अपने गृह नगर जामनेर में एकदम रिलैक्स नज़र आए। जामनेर में भाजपा के किसी भी वरिष्ठ नेता की कोई प्रचार सभा नहीं हुई। महाजन ने भविष्यवाणी कर रखी है कि जलगांव और रावेर दोनों सीटे भाजपा लाखों वोटों के अंतर से जीतेगी। चुनाव को लेकर महाजन के प्रदीर्घ अनुभव का आदर करना भाजपा संगठन के अनुशासन का हिस्सा हो सकता है।

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