रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मुस्लिम समाज का मुक़द्दस पवित्र बरकतों और रहमतों वाले महीने माहे रमज़ान में मुस्लिम समाज के बुजुर्ग नौजवान महिलाएं रोज़ा रखकर इबादतों में मशगूल हैं साथ ही नमाजें अदा कर अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा कर रहे हैं।
इसी के साथ मुस्लिम समाज के नन्हें मुन्ने बच्चे भी रोज़े रखने में पीछे नहीं हैं। मेघनगर नयापुरा निवासी अमजद खान पठान अम्मी फरिन खान की बेटी माहेरा खान पठान उम्र 6 वर्ष ने अपनी छोटी सी उम्र में अपना पहला रोज़ा रखा। माहे रमज़ान का रोज़ा करीबन 15 घंटे का हो रहा है। माहेरा खान ने पुरा दिन रोजा रख कुरान की तिलावत के साथ नमाज़ भी अदा की। माहेरा ने अल्लाह की इबादत की ओर रोजा रखा माहे रमजान के पवित्र व मुकद्दस महीने में रोजा रखना सभी मुस्लिम समाज जन पर फर्ज है।
