आज है शब ए बारात, जानें क्यों मनाया जाता है ये त्योहार | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आज है शब ए बारात, जानें क्यों मनाया जाता है ये त्योहार | New India Times

शाबान का चांद नज़र आने के बाद जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था वो आखिर आ ही गया। आज 25 फरवरी को शब-ए-बारात पूरे देश भर में मनाई जा रही है।

इसे लेकर मुस्लिम समुदाय खासा उत्साहित है

25 को रतजगा जागरण की रात रहेगी व 26 को रोज़े का एहतमाम किया जाएगा। बच्चों ने व बड़े हज़रात ने रात को जागरण की व इबादतें की व सुबह सहरी में रोज़ा रखा। पूरे दिन रोज़े का एहतमाम करने के बाद नमाजे मग़रिब (शाम) में रोज़ा खोलने का एहतमाम किया गया।

शब-ए-बारात पूरे भारत में इस बार 25 फरवरी को मनाई जा रही है। ऐसे ही इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। मुस्लिम समुदाय में मान्यता है कि इस दिन की गई इबादत का सवाब बहुत ज्यादा होता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक माह -ए-शाबान को बेहद पाक और मुबारक महीना माना जाता है। कहा जाता है की इस दिन की गई इबादत में इतनी ताकत होती है की वो किसी भी तरह के गुनाहों से माफी दिलाती है।

दरअसल इस माह में शाबान का चांद नज़र आया और 15वीं शाबान की इस्लाम धर्म के अनुयायी के लिए ये त्योहार बहुत अहम होता है। इसे शब ए बारात या शबे बारात के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक हर साल शब-ए-बारात शाबान महीने की 15 वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस दिन शब ए बारात की खास नमाज भी पढ़ी जाती है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और नेपाल में इसे शब-ए-बारात कहा जाता है। लफ्जों शब और बारात से मिलकर शब-ए- बारात बना है। शब से मतलब रात से है और बारात का मतलब बरी यानी बरी वाली रात से है। सऊदी अरब में शब-ए-बारात को “लैलतुल बराह या लैलतुन निसफे मीन शाबान” कहते हैं।

गुनाहों से तौबा की रात

शब-ए बारात की रात ऐसी रात है जो सभी गुनाहों से गुनाहगार को माफी दिलाती है। इस पाक रात के दिन जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करता है, उसके सामने अपने गुनाहों से तौबा करता है परवरदिगार उसे माफी अता करता है। यही वजह है कि कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग इसके लिए खास तैयारियां करते हैं।

इस रात मरहूमों के लिए इसाले सवाब किया जाता है

इस दिन केवल खुदा की इबादत ही नहीं की जाती बल्कि वो अपने जो अल्लाह को प्यारे हो गए हैं उनकी कब्र पर जाकर इसाले सवाब के जरिए उनको याद करते हैं। कब्रों पर दरूद फातेहा पड़ी जाती है और दुनिया को अलविदा कह गए अपनों के लिए मगफिरत की दुआएं पढ़ी जाती हैं। माना जाता है। कि रहमत की इस रात में अल्लाह पाक कब्र के सभी मुर्दों को आजाद कर देता है। कुछ मुस्लिम समुदाय के यहां इस शब ए बारात की रात मीठा बनाने का रिवाज है।

शब ए बारात की  रात इस्लाम में 4 मुकद्दस रातों में से एक मानी जाती है

वापस अपने घर का रुख कर सकते हैं, इसलिए मस्जिदों और कब्रिस्तानों में इस दिन मुस्लिम लोग अपने पूर्वजों को याद करने के लिए पहुंचते हैं। घरों में मीठे पकवान बनते हैं और इन्हें दुआ करने, इबादत के बाद गरीबों में बांटा जाता है। इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों में की गई खास सजावट देखते ही बनती है। ये शब ए बारात की  रात इस्लाम में 4 मुकद्दस रातों में से एक मानी जाती है। पहली होती है आशूरा की रात, दूसरी शब-ए- मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए- कद्र की रात कही जाती है।

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