कोरोना में फलाफूला नकली शराब का धंधा, चार साल के भीतर 300 मौतें, मृतकों का कोई व्यापक आधिकारिक रेकॉर्ड नहीं, अज्ञात बीमारी के नाम पर शवों का अंतिम संस्कार | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2020 शीत सत्र के दौरान राहुल गांधी के संसद में दिए भाषण को गंभीरता से लेते हुए मोदी सरकार फ़ौरन अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद कराती तो भारत में ना कोरोना फैलता ना 50 लाख से अधिक लोगों की जान जाती और ना हि अर्थ व्यवस्था का नुकसान होता। इन तथ्यों को सीने में दबाकर लोग धर्म के आसरे महंगाई के परम आनंद में जी रहे हैं। आज चारों दिशाओं में माहौल को नमो नमो और बस नमो नमोमय करने की कवायद शुरू है। इस रिपोर्ट में हम कोरोना काल में फले फुले नकली शराब के विषय पर रोशनी डालेंगे। वित्तिय सहायता को लेकर मोदी सरकार के सौतेलेपन से परेशान उद्धव ठाकरे सरकार ने राजस्व जनरेट करने के लिए आबकारी विभाग को छूट दी थी। इसी बात का फायदा उठाकर आपदा में अवसर खोजने वाले असामाजिक तत्वों ने नकली शराब मार्केट में उतारी। प्लास्टिक बैग में भरकर गली मोहल्लों में आज भी यह शराब खुले आम बिक रही है।

ऑफ लाइन सोर्सेज के मुताबिक जहरीली शराब पीने से अकेले जामनेर ब्लॉक में बीते चार सालों में 300 लोगों की मौत हो चुकी है यह आंकड़ा यकीनन ज्यादा हो सकता है। सबसे अधिक मौतें कोरोना के छह महीनों के दौरान हुई है। 20 से 40 साल के आयु वाला युवा वर्ग प्लास्टिक बैग में मिलने वाली जहरीली नकली शराब का शिकार बना है। कई शवों का पोस्ट मार्टम नहीं कराया गया, सारा कुछ कोरोना में निपटा दिया गया। नाम मात्र मामले है जो अकस्मात मृत्यु तहत थाने में दर्ज कराए गए। आश्चर्य की बात यह है कि नक़ली शराब पीने से मरने वाले कई इंसानों को किसी लंबी बीमारी से पीड़ित बताकर दुनिया से रुखसत कर दिया गया। सरकारी अस्पताल के डीन ने NIT को बताया कि यह मसला काफ़ी गंभीर है Alcoholic Intoxication के मामले लक्ष्यणीय है। जैसा कि हमने बताया कि अनेकों मामले दर्ज हि नहीं होते तो NCRB ( National Crime Record Bureau ) की रिपोर्ट से कोई आधिकारिक डेटा मिलेगा इसकी गुंजाइश कम है। हां आप पाठकों को लोकल अखबारों में छपी ख़बरोंं में नेताओं द्वारा दिए गए नशे से दूर रहो जैसे राजकीय भाषणों का कचरा खूब मिलेगा।


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By nit

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