कनिष्ठ अभियंता अमृतकर, बोरोले को आयुक्त ने ज़ारी किए कारण बताओ नोटिस | New India Times

विशेष प्रतिनिधि, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कनिष्ठ अभियंता अमृतकर, बोरोले को आयुक्त ने ज़ारी किए कारण बताओ नोटिस | New India Times

महानगर निगम आयुक्त विद्या गायकवाड ने लापरवाह अधिकारी के खिलाफ एक्शन मोड में दिखाई दे रही हैं।शनिवार को लोक निर्माण विभाग के लापरवाह और गुणवत्ता पूर्वक कार्य नहीं करने के कारण दो कनिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ कारण बताओं नोटिस जारी कर मनपा के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

समीर शशिकांत बोरोले कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग को महानगर निगम प्रशासक तथा आयुक्त गायकवाड़ ने निर्माण कार्य में उदासीनता बरतने के कारण पहली गाज सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता मनीष अमृतकर पर तो दूसरी गाज समीर शशिकांत बोरोले पर गिराई हैं।

महानगर निगम प्रशासन ने बोरोले को कारण बताओ नोटिस जारी कर बताया है, की महाराष्ट्र सुवर्ण जयंती नगरोत्थान महाभियान योजना के तहत वार्ड क्रमांक 16 में निविदा के अनुसार चार कार्य को मान्यता देकर टेंडर ज़ारी किए गए थे। जिसमें सड़क डामरीकरण तथा सीमेंट कंक्रीट के विकास कार्य प्रस्तावित थे। उक्त कार्यों हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी। उक्त निविदा धारक से उसके पास मौजूद दस्तावेज़ मनपा प्रशासन ने मांगे थे। कागज़ों की पूर्ति हेतु शॉर्ट फॉल द्वारा सूचित भी किया गया था। इसके बावजूद जूनियर इंजीनियर ने इस मामले को लगभग एक महीने तक खुद के पास लंबित रख कर प्रशासन को गुमराह किया है।

मनपा आयुक्त गायकवाड़ ने समीर शशिकांत बोरोले को फटकार लगाते हुए नोटिस में कहा कि इसके कारण नगरोत्थान महा अभियान योजना के तहत होने वाले विकास काम में देरी हुई और विकास कार्य बाधित हुआ है।

आयुक्त ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यदि उक्त धनराशि निर्धारित अवधि के अन्दर व्यय नहीं होती है तो धनराशि वापस जाने की संभावना है। नगर निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इंजीनियर समीर शशिकांत बोरोले पर नोटिस भेजा कर कहा कि मामला बेहद गंभीर और गैरजिम्मेदाराना है। प्रथम दृष्टया जो कर्तव्य सौंपा, उसमें कर्तव्य में लापरवाही देखी गई है।
महाराष्ट्र महा नगर निगम अधिनियम की धारा 56 के अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों प्रस्तावित नहीं की जाए। इस का खुलासा तीन दिनों के भीतर पेश करने के आदेश दिए हैं।

अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी

आदेश प्राप्ति से तीन दिन के भीतर विभागाध्यक्ष की राय के साथ लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए। यदि समय सीमा के भीतर खुलासा प्राप्त नहीं होता है, तो दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
मनपा आयुक्त गायकवाड़।


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