नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

किसी प्रोजेक्ट के बारा कैसे बजाने हैं यह अधिकारी को पता रहता है। इसके लिए अफसरों के साथ साथ वो नेता भी जिम्मेदार हैं जो केवल नारियल तोड़ने और रिबन काटने के शौक़ीन होते हैं। अफसर तबादला कर आगे कि पोस्ट पर निकल जाते हैं लेकिन उनका किया जनता को सालो साल भुगतना पड़ता है। जामनेर शहर की समांतर पाइप लाइन इसी मानसिकता का शिकार बन गई है। 2007 – 2012 के दौरान वाघूर डैम से जामनेर तक पेय जल आपूर्ति के लिए सड़क के बीचोबीच बिछाई गई दो तरफा पाइप लाइन नगर परिषद के लिए सिरदर्द बन चुकी है। तत्कालीन समय साढ़े छह मीटर पर बिछाया गया पाइप लाइन का भूमिगत सेट अप अब सड़क के साढ़े बारा मीटर तक फोरलेन बनने के बाद बीचोबीच आ गया है।

भूमी आबंटन के कानूनी पचड़े के चलते बायपास (रिंग रोड) का काम ठप हो गया है। सारा का सारा हेवी लोडेड यातायात परिचालन सिटी के भीतर से हो रहा है। आए दिन पाइप लाइन टूटती फूटती है ट्रैफिक जाम होता है। पानी के रिसाव से 8 करोड़ से बनी फोरलेन सड़क के गुणवत्ता की पोल बार बार खुल रही है। इस पाइप लाइन को रिपेयर करते करते नगर परिषद प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं उसमें रिपेयरिंग का खर्चा अलग से एडजस्ट करना पड़ रहा है। मुख्याधिकारी सतीष दिघे के कार्यकाल में यह पाइप लाइन बिछाई गई थी इसके कुप्रबंधन के लिए नगर परिषद के साथ साथ PWD विभाग भी बराबर का दोषी है।
विकास के नाम पर जामनेर में किया गया एक भी काम तकनीकी प्रावधानों के तहत ढंग का नही है। नेताजी के साथ ठेकेदार कम कार्यकर्ता मस्त लेकिन जनता त्रस्त यह सच्चाई है। 2014 से अब तक जलगांव की सड़कों और बुनियादी ढांचे की बदहाली इसी सिस्टम का अभिन्न हिस्सा है। जलगांव के नागरिक आज सुरेश जैन के गुणवत्ता पूर्ण विकास मॉडल को याद करते नहीं थकते।
कल 168 ग्राम पंचायतों के लिए वोटिंग – 5 नवंबर को जिले की 168 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान होगा। जामनेर की 17 ग्राम पंचायतों का समावेश है। महाराष्ट्र में कुल 2359 ग्राम पंचायत के लिए कल वोट डाले जाएंगे। नतीजे 6 नवंबर को आने है।
