होश में आओ होश में आओ फडणवीस होश में आओ LGBTQ ने सरकार को ललकारा, शमीभा के नेतृत्व में आंदोलन का आगाज़ | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

होश में आओ होश में आओ फडणवीस होश में आओ LGBTQ ने सरकार को ललकारा, शमीभा के नेतृत्व में आंदोलन का आगाज़ | New India Times

हमें हमारा हक दो, हक दो हक दो नहीं तो भीख दो इस दर्खास्त के साथ LGBTQ समुदाय की बहनों ने महात्मा फूले – शाहू महाराज – डॉ बाबासाहब आंबेडकर इनकी प्रतिमा को अभिवादन कर राज्य सरकार के खिलाफ़ अपने आंदोलन का बिगुल बजा दिया। तृतीय पंथी हक अधिकार संघर्ष समिती के बैनर और शामीभा पाटील के नेतृत्व में जलगांव कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रही धुलिया की पार्वती जोगी, मयूरी आवलेकर, सोनल पाटील, मीरा पाटील, झोया शिरोले, अंजली पाटील, निकिता मुकदल, चांद तड़वी, विजया वसावे समेत तमाम थर्ड जेंडर ने शिंदे – फडणवीस सरकार द्वारा की गई वादाखिलाफी और संविधान विरोधी भूमिका की जमकर आलोचना की। ज्ञापन का कागज़ हाथ में लेकर मीडिया से मुखातिब होती शमीभा कहती है कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से पारित पत्र के मुताबिक पुरुष महिलाओं की तरह थर्ड जेंडर के रूप में हमारे समुदाय के तत्वों को सरकारी नौकर भर्ती में शामिल किया जाना चाहिए। तृतीय पंथी कल्याण मंडल का जिला कार्यालय बनाकर वहां हम में से किसी काबिल की बतौर अधिकारी नियुक्ति कराई जाए। छात्र दशा में पढ़ाई करने वाले थर्ड जेंडर को छात्रवृत्ति मिले उनको होस्टल में दाखिले के साथ हर महीना पांच हजार रुपए शिक्षा भत्ता दिया जाना चाहिए।

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LGBTQ को सरकारी आवास योजनाओ का लाभ बराबरी से दे इन मांगो के लिए हम सब लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे है। शामीभा की तकरीरों को बल देने के लिए कार्यकर्ताओं की ओर से होश में आओ होश में आओ राज्य सरकार होश में आओ, फडणवीस होश में आओ जैसे जोशपूर्ण नारे बुलंद किए गए। मराठी पत्रकार सम्मेलन के बहाने कलेक्ट्रेट के एक हॉल मे इकठ्ठा हुए पत्रकारो ने LGBTQ के इस प्रदर्शन की सुद ली इसी बीच मंत्री गुलाबराव पाटील सुरक्षा घेरे में परिसर से निकल गए। ज्ञात हो कि LGBTQ समुदाय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसलो के जरिए भारत के संवैधानिक मूल्यो को सर्वोपरी रखा है। मोदी सरकार की दूसरी टर्म में न्यायपालिका और कार्यपालिका में काफ़ी टकराव देखने को मिल रहा है जिसके कारण शीर्ष अदालत के फैसलों को भाजपा शासित सरकारों की ओर से सिरे से दरकिनार किया जा रहा है। इधर महाराष्ट्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिए हो रहे आरक्षण आंदोलनों का भाजपा को सामना करना पड़ रहा है।

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