अबरार अहमद खान/ विक्रांत रेड्डी, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्य प्रदेश के ज़िला बैतूल से डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे पैदल न्याय यात्रा लेकर भोपाल पहुंची।
एमपी नगर स्थित बोर्ड आफिस चौराहे पर उन्होंने आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वह सीएम हाउस तक जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका तो तीखी नोक झोंक हो गई। जिस से उनके कपड़े फट गए।
साथ ही साथ आंबेडकर की फोटो भी फट गई।

ऐसे में वरिष्ठ बौद्ध धर्मगुरु भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो, भारतीय संविधान बचाओ अभियान, संस्थापक एवं समाजिक कार्यकर्ता शरद कुमरे, डॉ आंबेडकर युवा परिषद के अध्यक्ष राहुल जाधव, सर्वधर्म संभावना मंच के गुरुचरण अरोड़ा,अहिरवार समाज संघ के राजेश अहिरवार, बुद्धभूमि महाविहार उपासिका संघ के वंदना मुलताइकर,अशोका बुद्ध विहार समिति के अशोक पाटीदार, जमीयत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून साहब, भारतीय बौद्ध महासभा, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के डॉ मोहनलाल पाटील,राष्ट्रीय बौद्ध महासभा, संत रविदास आश्रम महेश नंदमेहर , उन्नतिशील जान विचार कल्याण महासंघ, बुद्धिस्ट जागृति मंच कई सामाजिक संगठनों के लोगों ने घोर निंदा करते हुऐ कड़ा विरोध जताया है।

पुलिस की बर्बर कार्यवाही एवं राज्य सरकार के मूक बने रहने पर संगठन के लोगों ने कहा कि जिस तरह बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर को तोड़ा गया और संविधान की प्रति को फाड़ा गया, इससे साबित होता है कि राज्य की सरकार संवैधानिक मूल्यों में विश्वास नहीं करती है।दलित और आदिवासियों को उनके मौलिक अधिकारों से भी वंचित रखना चाहती है। इन सभी संगठनों ने आने वाले दिनों में इस घटना के विरोध में उग्र आंदोलन की रणनीति बनाई है।

आप को बता दें कि निशा बांगरे ने 25 जून को आमला में अपने घर के उद्घाटन समारोह के दौरान सर्व धर्म प्रार्थना और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए छुट्टी मांगी थी पर प्रशासन ने उन्हें छुट्टी नहीं दी थी जिस से वह नाराज़ हो कर अपने विभाग को एक पत्र लिखकर इस्तीफा दे दिया था लेकिन प्रशासन ने इसे मंज़ूर नहीं किया। निशा ने अपने पत्र में लिखा है कि मैं सूचित करना चाहती हूँ कि मेरे स्वयं के मकान के उद्घाटन / शुभारंभ कार्यक्रम में विभाग द्वारा मेरे उपस्थित न होने देने के विषयांतर्गत पत्र से मैं हृदय की गहराई से अत्यधिक आहत हूँ । उक्त कार्यक्रम में विश्व शांतिदूत “तथागत बुद्ध ” की अस्थियों के भी दर्शनलाभ करने की अनुमति न देने से मेरी धार्मिक भावनाओं को अपूर्णनीय क्षति पहुँची है।

‘अत: मैं अपने मौलिक अधिकार, धार्मिक आस्था एवं संवैधानिक मूल्यों से समझौता करके अपने डिप्टी कलेक्टर के पद पर बने रहना उचित नही समझती हूँ। इसीलिए मैं अपने डिप्टी कलेक्टर पद से दिनांक 22/06/23 को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देती हूँ।
