तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:

रायसेन जिले के वार्ड क्रमांक 6 निवासी हैदर इन दिनों मुंह के कैंसर से जूझ रहा है और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। वह न ठीक से खाना खा पा रहा है और न ही पानी पी पा रहा है। दर्द से कराहते हैदर के सामने बीमारी से ज्यादा बड़ी चुनौती इलाज की व्यवस्था बन गई है।
परिजनों के अनुसार, पिछले करीब तीन महीनों से वे आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए नगर पालिका से लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। कार्ड नहीं बनने के कारण हैदर का इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है।
परिवार ने बताया कि हैदर को कई बार भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल और कैंसर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन आयुष्मान कार्ड के अभाव में इलाज आगे नहीं बढ़ सका। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए महंगे इलाज का खर्च उठाना संभव नहीं है।
एक ओर सरकार स्वास्थ्य योजनाओं और सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक जरूरतमंद मरीज कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर इलाज से वंचित है। इससे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हैदर की हालत दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। परिजनों को आशंका है कि यदि जल्द इलाज शुरू नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
अब देखना यह होगा कि इस ख़बर के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम उठाता है या फिर एक और मरीज इलाज के इंतजार में जिंदगी की जंग हार जाएगा।

