अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय (एसएसवी कॉलेज) में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर एनएसएस इकाई 1 और 2 के संयुक्त तत्वावधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार मिश्र ने की।
अपने संबोधन में डॉ. मिश्र ने बाबा साहेब के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हमें शिक्षा और सामाजिक न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। इस दौरान उन्होंने यह भी घोषणा की कि महाविद्यालय को इग्नू की पढ़ाई प्रारंभ करने की अनुमति प्राप्त हो गई है।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मंच संचालन महाविद्यालय की छात्रा साक्षी कुमारी ने किया।
कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार ने अंबेडकर के प्रसिद्ध कथन—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं प्राध्यापक डॉ. दिलीप कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों को बाबा साहेब के विचारों और मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
हिंदी विभाग के डॉ. सितारे हिन्द ने अंबेडकर के विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को रेखांकित किया। प्राचीन इतिहास विभाग के डॉ. रामजी पासवान ने बताया कि बाबा साहेब ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश-विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अनेक विषयों में विशेषज्ञता हासिल की।
रणधीर चौधरी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद बाबा साहेब ने भारतीय संविधान का निर्माण कर एक समतामूलक समाज की नींव रखी।
कार्यक्रम में डॉ. अनादि प्रसाद सिंह सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। अंत में कार्यक्रम संयोजक उमाशंकर पासवान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधान सहायक रमेश कुमार ठाकुर, कुमार निखिल, एनएसएस के स्वयंसेवक एवं एनसीसी के कैडेट्स उपस्थित रहे।

