फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर भीमसेना के राष्ट्रीय प्रमुख सतपाल तंवर ने हरियाणा और राजस्थान में तूफानी दौरा किया। मंगलवार को वे सबसे पहले गुरुग्राम के कांकरोला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में भाग लिया।
कांकरोला में कार्यक्रम के बाद तंवर तुरंत राजस्थान के तिजारा क्षेत्र के खैरथल पहुंचे और वहां आयोजित समारोह में शामिल हुए। इसके बाद वे वापस गुरुग्राम के शक्ति पार्क पहुंचे, जहां डॉ. अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।
इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी निशा तंवर एडवोकेट, सहयोगी योगिता गुज्जर एडवोकेट, धर्मबीर तंवर नंबरदार और श्रीनिवास तंवर सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

टूटी प्रतिमा से आंदोलन तक और नई स्थापना
गौरतलब है कि पिछले वर्ष कांकरोला गांव में डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने से तनाव की स्थिति बन गई थी। इस घटना के बाद सतपाल तंवर ने आंदोलन की कमान संभाली और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया था। उनके नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद सरकार ने कांकरोला में अष्टधातु की नई प्रतिमा स्थापित कराई।
कड़ी सुरक्षा में हुआ दौरा
तंवर के इस दौरे के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हरियाणा पुलिस और भीमसेना प्रशासनिक प्रबंधन विभाग की ओर से विशेष व्यवस्था की गई। वे निजी सुरक्षा और पुलिस सुरक्षा के बीच विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए।
संविधान और भाईचारे का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतपाल तंवर ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर का संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि समानता, न्याय और बंधुत्व का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने लोगों से जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर आपसी सम्मान और भाईचारे को मजबूत करने की अपील की।
कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भीमसेना कार्यकर्ता, स्थानीय लोग, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए। सभी ने मिलकर डॉ. अम्बेडकर जयंती को उत्सव के रूप में मनाया। स्थानीय पदाधिकारियों ने तंवर का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए।
भीमसेना प्रमुख का यह दौरा हरियाणा और राजस्थान में भीम आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है।

