पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (म.प्र.), NIT:

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन के तहत 11 अप्रैल को विकास खंड तिरला में सैकड़ों शिक्षकों ने अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
यहां से शिक्षक रैली के रूप में तपती धूप में टीईटी के खिलाफ हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक के नाम संबोधित ज्ञापन विकास खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपा।
तिरला में आयोजित धरना-रैली एवं प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। साथ ही शिक्षकों ने घोषणा की कि 18 अप्रैल को राज्य स्तर पर भी प्रदर्शन किया जाएगा।
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो स्कूलों में तालाबंदी कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संयुक्त मोर्चा के तहत शिक्षकों ने ब्लॉक स्तरीय प्रदर्शन में भाग लिया। शिक्षकों ने मीडिया को बताया कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।
लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने वाले शिक्षकों को सेवा से पृथक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी फैसले से शिक्षकों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया है।
शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने सहित 2 मार्च को लोक शिक्षण संचालनालय और 26 मार्च को जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी परीक्षा आदेश को निरस्त करने की मांग की है। वहीं, केंद्र सरकार से सेवारत शिक्षकों के पक्ष में अध्यादेश लाकर टीईटी से राहत देने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा प्रदेश के नवीन संवर्ग के शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।

