राजस्थान में मुस्लिम बेटियों ने रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन से बनाए नए आयाम | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ़, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान में मुस्लिम बेटियों ने रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन से बनाए नए आयाम | New India Times

पिछले दिनों राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम में मुस्लिम समुदाय के मावा गांव की किस्मत बानो कायममखानी ने अपने समुदाय के लड़कों से आगे निकलते हुए राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में स्थान प्राप्त कर बेटियों के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। इससे पहले असलम खान और फरहा हुसैन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) परीक्षा उत्तीर्ण की थी। असलम खान दिल्ली में आईजी पुलिस के पद पर कार्यरत हैं, जबकि फरहा हुसैन जयपुर में आयकर विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।

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इसी क्रम में, हाल ही में घोषित 10वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणाम में हजारों मुस्लिम बेटियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है।
इस वर्ष 12 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित 10वीं कक्षा की परीक्षा में कुल 10,68,109 विद्यार्थियों ने भाग लिया था, जिनमें लड़कियों का परिणाम बेहतर रहा। इतिहास में पहली बार राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा से पहले 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित किया है।

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राजस्थान शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी 10वीं कक्षा के परिणामों पर नजर डालें तो सीकर की सौ साल पुरानी इस्लामिया स्कूल और एक्सीलेंस गर्ल्स स्कूल सहित राज्य के कई विद्यालयों की हजारों मुस्लिम छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इससे समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और अभिभावकों को बेटियों की शिक्षा के लिए और अधिक अवसर प्रदान करने की प्रेरणा मिली है।

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95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—सीकर की मायदा खान (98.17%), नोहर की अतिका खान (97.33%), रतननगर (चूरू) की शाहीन बानो (97.67%), निम्बी गांव की अलवीरा (96.33%), चुड़ी गांव की मौसम बानो (96.67%), जाखल गांव की आफरीन खान (96.83%), सीकर की अलवीरा बानो (96.83%), रोलसाहबसर गांव की ऐजल खान (95.50%), छापरी गांव की अलीसना (95.17%) और सोफिया खान (95.17%) शामिल हैं।

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कुल मिलाकर देखा जाए तो विश्व में साक्षरता दर और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ईरान जैसे देश अग्रणी हैं, जहां महिलाएं शिक्षा के बल पर वैज्ञानिक बनकर नए-नए शोध कर रही हैं। इसी तरह यदि राजस्थान का मुस्लिम समुदाय भी बेटियों को विशेष रूप से विज्ञान शिक्षा में आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करे, तो वे देश की सेवा करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में लड़कियों की शिक्षा को लेकर संकीर्ण सोच का प्रभाव बहुत कम है। यहां मुस्लिम समुदाय में बेटों और बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर दिए जा रहे हैं।

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