मेघनगर में सरस्वती शिशु मंदिर का दो दिवसीय सेवक-सेविका सम्मेलन सम्पन्न | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मेघनगर में सरस्वती शिशु मंदिर का दो दिवसीय सेवक-सेविका सम्मेलन सम्पन्न | New India Times

मेघनगर के सरस्वती शिशु मंदिर में 23 से 24 मार्च तक आयोजित दो दिवसीय सेवक-सेविका सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य सेवक एवं सेविकाओं को संगठन, कार्यपद्धति और शिशु मंदिर योजना से परिचित कराना तथा उनके कार्यों में दक्षता विकसित करना रहा।
उद्घाटन सत्र में मिला मार्गदर्शन
23 मार्च को आयोजित उद्घाटन सत्र में विभाग समन्वयक अंबिकादत्त कुंडल, क्षेत्रीय संयोजक (संस्कृति बोध परियोजना) बलिराम बिल्लौरे, वर्ग संयोजक एवं प्राचार्य आलीराजपुर, महाप्रबंधक धनराज काग (प्रधानाचार्य मेघनगर) तथा सेवा भारती की पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्रीमती कल्लु निनामा मंचासीन रहे।
इस दौरान अंबिकादत्त कुंडल ने “हम यहाँ क्यों आए हैं” विषय पर चर्चा करते हुए शिशु मंदिर योजना के उद्देश्य और कार्यप्रणाली से अवगत कराया।
विभिन्न सत्रों में कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा
द्वितीय सत्र में बलिराम बिल्लौरे ने विद्यालय में किए जाने वाले आवश्यक कार्यों जैसे SOP तैयार करना, समय पालन, लेखा-जोखा संधारण, क्रियान्वयन एवं भौतिक सत्यापन पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
तृतीय सत्र में अंबिकादत्त कुंडल ने सेवक-सेविकाओं को अपने कार्य में कुशलता लाने के उपाय बताए।
चतुर्थ सत्र में संध्यावंदन के साथ रामायण एवं महाभारत पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
इसके बाद भजन एवं गीतों के माध्यम से अभिव्यक्ति सत्र आयोजित हुआ।
हनुमंत आश्रम में दर्शन एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन
24 मार्च को प्रतिभागियों ने पीपलखूंटा स्थित हनुमंत आश्रम में दर्शन लाभ लिया।
सप्तम सत्र में सह प्रांत प्रमुख सुंदरलाल शर्मा ने सेवक-सेविकाओं के कार्यों की समीक्षा करते हुए संगठन की भूमिका को “त्रिवेणी संगम” की उपमा दी और सभी को निरंतर सक्रिय रहने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बीमा योजना से जुड़ने की भी सलाह दी।
समापन सत्र में सेवा और समर्पण का संदेश
समापन सत्र में अंबिकादत्त कुंडल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सेवक-सेविकाओं का कार्य माता शबरी की भांति समर्पणपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कर्मयोग को जीवन का आधार बताते हुए सेवा को ही साधना बताया।
साथ ही शंकराचार्य, तोटकाचार्य, संत एकनाथ, संत रैदास और तुलसीदास जैसे संतों के प्रसंगों के माध्यम से समर्पण और भक्ति का महत्व समझाया।
संचालन टोली का विशेष योगदान
सम्मेलन के सफल संचालन में वर्ग संयोजक बलिराम बिल्लौरे, महाप्रबंधक धनराज काग, बौद्धिक प्रमुख शिवराम खंडहर, सह बौद्धिक प्रमुख राहुल लववंशी, मुख्य सचेतक विनोद माली, सेविका आवास प्रमुख श्रीमती नीता घूमरे तथा सहप्रबंधक देवराज चन्द्रवंशी सहित पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अंत में बलिराम बिल्लौरे ने सभी का आभार व्यक्त किया और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

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