जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इतवारा क्षेत्र में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए संगठन ने केंद्र सरकार से इस संबंध में ठोस निर्णय लेने की मांग की।
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य में गाय के नाम पर राजनीति हो रही है और विभिन्न स्थानों पर गौ-अवशेष मिलने की घटनाओं से सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष है।
इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की कोई योजना नहीं है। वर्तमान में बाघ देश का राष्ट्रीय पशु बना रहेगा।
वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी थी, जब कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई थी।
इधर, हाल ही में भोपाल सहित कुछ अन्य जिलों में त्योहारों के दौरान गौ-अवशेष मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। 23 मार्च 2026 को तलाईया क्षेत्र स्थित काली मंदिर के बाहर गौ-अवशेष मिलने के बाद स्थानीय संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी विशेष साजिश की पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, दिसंबर 2025 में भोपाल के जिंसी स्थित नगर निगम के आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़े 26 टन मांस बरामदगी के मामले ने भी तूल पकड़ा। जांच में यह सामने आया कि यह मांस प्रतिबंधित श्रेणी का था, जबकि उक्त स्लॉटर हाउस को केवल भैंस के वध की अनुमति थी।
प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए स्लॉटर हाउस को स्थायी रूप से सील कर दिया, कई अधिकारियों को निलंबित किया और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में बुलडोजर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों के अनुसार, यह स्लॉटर हाउस नगर निगम की अधिकृत परियोजना था, न कि अवैध निर्माण, इसलिए इसे ध्वस्त करने के बजाय प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की गई।
इस घटनाक्रम के बाद विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने कार्रवाई में समानता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि कानून का पालन बिना भेदभाव के होना चाहिए, ताकि न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।

