रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

ईद-उल-फितर का पवित्र त्योहार देशभर में बड़े हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग ईद की नमाज़ अदा करने के लिए ईदगाह पहुंचे। मेघनगर में ईदगाह पर मौलाना अम्मार साहब ने ईद की नमाज़ अदा करवाई और मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की गई।
नमाज़ के बाद मौलाना ने खुत्बा पेश किया, जिसे सभी ने सुकून और खामोशी के साथ सुना। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
मौलाना अम्मार साहब ने अपने बयान में कहा कि रमजान का महीना इंसान को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। हमें रमजान के बाद भी अपनी ज़िंदगी को नेक राह पर कायम रखना चाहिए। उन्होंने ज़कात, सदका और फितरा अदा करने की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि फितरा नमाज़ से पहले देना बेहतर है, हालांकि बाद में भी दिया जा सकता है।

उन्होंने आपसी एकता और भाईचारे पर बल देते हुए कहा कि समाज को एक जिस्म की तरह रहना चाहिए, जहां एक हिस्से को तकलीफ हो तो पूरा जिस्म उसका साथ दे।
मौलवी सलमान साहब और हाफिज मोहसिन पटेल साहब ने कहा कि हदीस के मुताबिक तीन लोगों की दुआ कभी रद्द नहीं होती—रोजेदार की इफ्तार के वक्त, एक न्यायप्रिय शासक की और एक मजलूम की। वहीं हाफिज रिजवान साहब ने बताया कि सच्चे दिल से की गई दुआ या तो कबूल होती है, या किसी मुसीबत को टाल देती है, या आख़िरत में उसका सवाब मिलता है।
ईद की नमाज़ के बाद लोगों ने कब्रिस्तान पहुंचकर अपने मरहूमों के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और ईसाले सवाब किया। शहर में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिली, जहां सभी समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को ईद की बधाई दी।
घरों में सेवइयां, खीर-खुरमा और विभिन्न पकवानों के साथ दावतों का दौर जारी रहा। इस तरह ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे क्षेत्र में उल्लास, प्रेम और सौहार्द के साथ मनाया गया।

