अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आइसा, इंकलाबी नौजवान सभा आरवाईए, सफाई मजदूर एकता मंच संबद्ध ऐक्टू ने पत्थर गिरिजाघर सिविल लाइंस धरना स्थल पर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा। कार्यक्रम में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के कोटेशन का पोस्टर लगाकर याद किया गया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का दुष्परिणाम पूरे देश के छात्रों नौजवानों को भुगतना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में स्कूल मर्जर/बंदी भी इसी नीति का परिणाम है।उन्होंने कहा कि 16 मई 2025 को जारी एक सरकारी आदेश के ज़रिए यह तय किया गया है कि जिन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में नामांकन कम है, उन्हें एक-दूसरे में मिला दिया जाएगा। इस आदेश के ज़रिए सिर्फ स्कूलों का विलय नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने की शुरुआत की जा रही है। इससे शिक्षा तक पहुँच और समानता का संकट और भी गहरा हो जाएगा। दरअसल, ये वही स्कूल हैं जहाँ वंचित तबकों से आने वाले सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई की शुरुआत करते हैं। उनके लिए यही स्कूल गरीबी और सामाजिक बहिष्कार से निकलकर बराबरी और सम्मान के साथ जीने की उम्मीद होते हैं।

उन्होंने कहा कि 16 मई 2025 को जारी एक सरकारी आदेश के ज़रिए यह तय किया गया है कि जिन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में नामांकन कम है, उन्हें एक-दूसरे में मिला दिया जाएगा। इस आदेश के ज़रिए सिर्फ स्कूलों का विलय नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने की शुरुआत की जा रही है। इससे शिक्षा तक पहुँच और समानता का संकट और भी गहरा हो जाएगा। दरअसल, ये वही स्कूल हैं जहाँ वंचित तबकों से आने वाले सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई की शुरुआत करते हैं। उनके लिए यही स्कूल गरीबी और सामाजिक बहिष्कार से निकलकर बराबरी और सम्मान के साथ जीने की उम्मीद होते हैं।यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-ए के खिलाफ है, जो 6 से 14 साल तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। यह प्रावधान 2002 में 86वें संशोधन के ज़रिए संविधान में जोड़ा गया था। इसी के तहत 2009 में ‘बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (आरटीई एक्ट) बना। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए 2011 में ‘उत्तर प्रदेश आरटीई नियमावली’ भी बनाई थी। राज्य सरकार ने स्कूलों को बंद करने के पीछे जो तर्क दिया है, वह यह है कि इन स्कूलों में नामांकन पर्याप्त नहीं है। लेकिन यह तर्क न सिर्फ कमजोर है, बल्कि कानून के प्रावधानों के भी खिलाफ है। बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 3 के अनुसार, 6 से 14 वर्ष तक की आयु का हर बच्चा पास के किसी विद्यालय में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पाने का हकदार है।
आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही बेरोजगारी झेल रहे नौजवान विद्यालय मर्ज कर बंद करने से बहुत ही ज्यादा हताश हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में हजारों प्राथमिक विद्यालय कम छात्र होने की वजह से बंद कर रही है। इसके लिए स्कूल संसाधनों की दक्षता बढ़ाने और शैक्षिक परिणामों में सुधार लाने के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज ज़िले में 50 से कम छात्रों वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया शुरू की है। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, इस विलय के लिए कुल लगभग 500 विद्यालयों की पहचान की गई है। यह योजना संसाधनों के अनुकूलन, बुनियादी ढाँचे के उपयोग को बढ़ाने और प्रत्येक छात्र के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की बात कह रही है लेकिन हकीकत इसके उलट है।

यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-ए के खिलाफ है, जो 6 से 14 साल तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। यह प्रावधान 2002 में 86वें संशोधन के ज़रिए संविधान में जोड़ा गया था। इसी के तहत 2009 में ‘बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ (आरटीई एक्ट) बना। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए 2011 में ‘उत्तर प्रदेश आरटीई नियमावली’ भी बनाई थी। राज्य सरकार ने स्कूलों को बंद करने के पीछे जो तर्क दिया है, वह यह है कि इन स्कूलों में नामांकन पर्याप्त नहीं है। लेकिन यह तर्क न सिर्फ कमजोर है, बल्कि कानून के प्रावधानों के भी खिलाफ है। बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 3 के अनुसार, 6 से 14 वर्ष तक की आयु का हर बच्चा पास के किसी विद्यालय में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पाने का हकदार है।
आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही बेरोजगारी झेल रहे नौजवान विद्यालय मर्ज कर बंद करने से बहुत ही ज्यादा हताश हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में हजारों प्राथमिक विद्यालय कम छात्र होने की वजह से बंद कर रही है। इसके लिए स्कूल संसाधनों की दक्षता बढ़ाने और शैक्षिक परिणामों में सुधार लाने के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज ज़िले में 50 से कम छात्रों वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया शुरू की है। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, इस विलय के लिए कुल लगभग 500 विद्यालयों की पहचान की गई है। यह योजना संसाधनों के अनुकूलन, बुनियादी ढाँचे के उपयोग को बढ़ाने और प्रत्येक छात्र के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की बात कह रही है लेकिन हकीकत इसके उलट है।
ऐक्टू के प्रदेश सचिव कॉ अनिल वर्मा ने कहा कि स्कूल मर्जर/ बंदी से गरीब मजदूर के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिसमें सफाई कर्मचारियों के बच्चे पढ़ने से वंचित हो जाएंगे। सरकार गरीबों से सिर्फ शिक्षा, रोजगार के साथ वोट देने का अधिकार भी छीन लेना चाहती है। आइसा, आरवाईए , सफाई मजदूर एकता मंच संबद्ध ऐक्टू ने ज्ञापन के माध्यम से स्कूल मर्जर/ बंदी को तत्काल बंद करने,बंद स्कूलों को पुनः खोलाने,प्राइवेट स्कूल, प्राइवेट नौकरी पर रोक लगाने, स्कूलों में सुविधाओं को बढ़ाकर बच्चों की संख्या बढ़ाने, बेहतर शिक्षा के लिए ‘कॉमन स्कूल सिस्टम’ लागू करने, रसोईयां को नियमित व न्यूनतम वेतन की गारंटी करने, सभी नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करने की मांग की।
प्रदर्शन को खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला संयोजक पंचम लाल, साफ मजदूर एकता मंच के अध्यक्ष बलराम पटेल, शिवम सफीर, सोनू यादव, राधा, पूजा, साक्षी, भानु, संतोष कुमार, राघवेंद्र पटेल, विवेक कुमार,शशांक, मानवेन्द्र, राम सिया ने संबोधित किया। संचालन राजबहादुर कुशवाहा ने किया। प्रेमचंद, अशोक, राम अवतार पाल, चंदन, अमित, समेत दर्जनों छात्र, नौजवान व सफाई मजदूर शामिल रहे।

