नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आजादी के 75 साल के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत पर 225 लाख करोड़ रुपए का क़र्ज़ हो चुका है 2014 में यह आंकड़ा 54 लाख करोड़ रुपए था। देश का कोई राज्य नहीं बचा जिस पर कर्ज़ नहीं है। महाराष्ट्र पर 09 लाख 34 हजार करोड़ रुपए का क़र्ज़ चढ़ चुका है जो 2014 में 02 लाख 94 हज़ार करोड़ रुपए था। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार को 01 लाख 7 हजार 32 करोड़ रुपए ठेकेदारों को देने है। सरकार के उपर PWD का 46 हजार करोड़ , ग्रामीण सड़क विभाग 18 हजार करोड़ , सिंचाई विभाग 13 हजार करोड़ , जल जीवन मिशन 12 हजार करोड़ , नगर विकास विभाग 04 हजार 217 करोड़ , नियोजन विभाग 02 हजार 515 करोड़ , ग्राम विकास विभाग का 08 हज़ार करोड़ रुपया बकाया है।
04 लाख 50 हजार करोड़ के वार्षिक बजट में महाराष्ट्र का वित्तीय घाटा 90 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। 09 लाख 34 हजार करोड़ रुपए के कर्ज़ पर सालाना 07 हजार करोड़ रुपया ब्याज की शक्ल में देना पड़ रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से महाराष्ट्र सरकार को हर साल मिलने वाला 70 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण बंद कर दिया गया है। कुल कर्ज़ 09 लाख 34 हजार करोड़ रुपए में से 2029 तक कम से कम 03 लाख करोड़ रुपया सरकार को ब्याज के साथ चुकाना होगा। बीजेपी के 11 साल के राज मे महाराष्ट्र पर 300 गुना कर्ज़ बढ़ गया है लेकिन उस अनुपात में प्रदेश में विकास प्रति व्यक्ति आय रोजगार कहीं नज़र नहीं आ रहा। मंत्रियों नेताओं की संपत्ति में अचानक से सैकड़ों करोड़ रुपए का इज़ाफ़ा ज़रूर हुआ है।

