गंगवारा सरपंच सचिव एवं रोजगार सचिव द्वारा मनरेगा ऐप पर फर्जी तरीके से फोटो व मजदूरों की उपस्थिति की जा रही है दर्ज  | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

गंगवारा सरपंच सचिव एवं रोजगार सचिव द्वारा मनरेगा ऐप पर फर्जी तरीके से फोटो व मजदूरों की उपस्थिति की जा रही है दर्ज  | New India Times

प्रदेश के मुख्यमंत्री भले ही प्रदेश में भ्रष्टाचार रोकने के लाख दावे कर लें, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के सारे दावे आज खोखले नजर आ रहे हैं। प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, भ्रष्टाचारियों की पहुंच और रसूख के आगे अफसर भी बौने नजर आते हैं। देवरी जनपद पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गंगवारा में सरपंच सचिव एवं रोजगार सचिव और रोजगार ग्राम पंचायत में मठाधीश बनकर बैठे हैं और विकास कार्यों के लिए आए सरकारी पैसे को दीमक की तरह खोखला करते थक नहीं रहे हैं। और सरपंच सचिव ने मनरेगा योजना की धज्जियां उड़ाने में खा रखी है कसम।

धड़ल्ले से डाली जा रही है करीबी व्यक्तियों को कमिशन का झांसा देकर  दर्ज की जा रही फर्जी हाजिरी। और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और सरकार एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं पंचायत ग्रामीण विकास मंत्री  सहित मनरेगा को संजीवनी बता रहे है। लेकिन सागर जिले में मनरेगा के कामों में मजदूरों की जगह सरपंच सचिव फायदा उठा रहे हैं। आपको बता दें कि सरपंच सचिव और रोजगार सचिव मनमानी कर मनरेगा योजना में मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी को डकार रहे हैं। उनके द्वारा नियम विरुद्ध दस्तावेज और फर्जी फोटो अपलोड कर मजदूरों की हाजिरी लगाई जा रही है।

सरपंच सचिव रोजगार सचिव द्वारा सीसी सड़क निर्माण खेरमाई मंदिर से हनुमान मंदिर तक गांव भजिया के नाम पर मनरेगा ऐप पर मजदूरों की फर्जी उपिस्थति दर्ज की जा रही है। सीसी सड़क की लंबाई करीब डेढ़ सौ मीटर बताई गई है और इसकी लागत कारी 4 से 5 लाख रुपए है। जबकि मौके पर एक भी मजदूर मजदूरी करते नजर नहीं आये। मनरेगा के एप पर सरपंच सचिव एवं रोजगार सचिव द्वारा फर्जी फोटो डाल कर शासन की राशि को पलिता लगा रहा है। इससे यह समझ आता है कि गंगवारा सरपंच सचिव और रोजगार सचिव ने मनरेगा योजना की धज्जियां उड़ाने की कसम खा रखी हो।

आपको बता दें कि जब ग्राम पंचायत गंगवारा के ग्रामीण जनों से इस विषय में चर्चा की तो उन्होंने बताया कि हम लोगों को आज तक की तारीख में ग्राम गंगवारा से कोई भी रोजगार नहीं मिला जो यहां पर सरपंच सचिव है वह अपने करीबी व्यक्तियों की फर्जी हाजरी डाल देते हैं जिन्होंने कभी धरातल पर कोई भी कार्य नहीं किया है। और वह पैसा निकाल लेते हैं  और कुछ कमीशन देकर शासन की राशि का आपस में बंदर बांट कर लेते हैं, सरपंच सचिव और रोजगार सचिव पर आलाधिकारियों द्वारा जांच कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई  कि जानी चाहिए। ताकि यह भ्रष्टाचार पंचायत द्वारा रोका जा सके और पात्र व्यक्तियों तक रोजगार मिल सके।

आपको बता दें कि जब भी अधिकांश पंचायत के भ्रष्टाचार मामले में अवगत कराने के लिए कार्यपालन अधिकारी मनीषा चतुर्वेदी  या  मनरेगा अधिकारी  उदयभान ठाकुर के लिए कॉल करते हैं तो उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया जाता। जो अधिकारियों के संरक्षण के चलते ग्राम पंचायत में सरपंच सचिव एवं रोजगार सचिव के होंसले बुलंद बने हुए हैं जिस कारण से शासन की राशि का बंदर बाँट धड़ल्ले से किया जा रहा है।

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