साहिल ने जीती ज़िला कुश्ती प्रतियोगिता, मल्टीपर्पज स्टेडियम बना होता तो नेशनल गेम्स में जलगांव का नाम रोशन कर पाते खिलाड़ी | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

साहिल ने जीती ज़िला कुश्ती प्रतियोगिता, मल्टीपर्पज स्टेडियम बना होता तो नेशनल गेम्स में जलगांव का नाम रोशन कर पाते खिलाड़ी | New India Times

जलगांव जिले के चालीसगांव में आयोजित जिला कुश्ती प्रतियोगिता में जामनेर के दो युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। 18 वर्ष की आयु वर्ग 96.3 किलो वजन में संपन्न कुश्ती में साहिल रहीम शेख ने पहला स्थान हासिल किया। 86 किलो वजन श्रेणी से अर्सलान खान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। इन दोनों खिलाड़ियों में अर्सलान के पिता नईम खान पहलवानी किया करते थे। साहिल के पिता रहीम शहर की एक सीबीएसई स्कूल के चेयरमैन है। 1993 से अब तक जामनेर तहसील के क्रीड़ा क्षेत्र के इतिहास में यह पहली बार देखने को मिला की कुश्ती में किसी युवा खिलाड़ी को मिली सफ़लता के बाद खेल प्रेमियों की ओर से जश्न मनाया गया हो। नजीम मुजावर, जाकिर शेख, निहाल शेख, अशोक जाधव, रफीक शेख, रेसलर संजय और दयाराम ने बच्चों को जीत की बधाई दी।

साहिल ने जीती ज़िला कुश्ती प्रतियोगिता, मल्टीपर्पज स्टेडियम बना होता तो नेशनल गेम्स में जलगांव का नाम रोशन कर पाते खिलाड़ी | New India Times

कब ख़त्म होगी स्टेडियम की प्रतीक्षा

अब बनेगा तब बनेगा इस शगूफे की तरह राशि भुशी टेकडी के पास नए स्टेडियम का विकास प्रस्ताव तैयार कराने में साल बीत गया। साल के साथ मंत्री गिरीश महाजन को मिला क्रीड़ा मंत्रालय अजीत पवार गुट के पास शिफ्ट हो गया। मंत्री पद रहते स्टेडियम के लिए पैसा आबंटित हुआ पर चमत्कारिक तरीके से डीपीआर का लोकेशन बदल गया। अब स्टेडियम के लिए सेंट्रल रेलवे की जमीन का सर्वे और डीपीआर का काम शुरू है। जिसके लिए प्रशासन को दौड़ाया जा रहा है और अखबारों की सुर्खियों से मंत्री जी को चमकाया जा रहा है पर स्टेडियम नहीं बन पा रहा है। अगर बीस साल पहले हि स्टेडियम बन जाता तो कई खिलाड़ी नैशनल गेम्स मे जलगांव जिले का नाम रोशन कर चुके होते। बीते तीस सालों से ब्लॉक में विकास के नाम पर कितना कुछ हो रहा है लेकिन लोग है की कथाओं में बाबाओं द्वारा भारत का संविधान बदल डालने जैसे बयानों को बिना किसी विरोध के सहमति देने में त्रस्त है। इन सब में कमाई पूतों के अलावा एक तबका ऐसा भी है जिसे धार्मिक तौर पर अतिराष्ट्रवादी विचार – व्यवहार का नाटक करने वाला भूरा चूहा कह सकते है। यह भूरा चूहा अपने बच्चो के भविष्य को भारत के बाहर अमरीका, कैनेडा, फ्रांस, इंग्लैंड जैसे इसाई देशों में संवार रहा है।

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