प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जोबट में उभरती हुई प्रतिभा साक्षी भयडीया पेंटिंग बना कर दिखा रही है अपनी प्रतिभा | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (मप्र), NIT:

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जोबट में उभरती हुई प्रतिभा साक्षी भयडीया पेंटिंग बना कर दिखा रही है अपनी प्रतिभा | New India Times

आदिवासी बाहुल्य अलिराजपुर जिले के जोबट में प्रतिभा की धनी साक्षी भयडीया पेंटिंग बनाने की शौक के चलते उभरती हुई प्रतिभा है. 21 वर्षीय साक्षी भयडीया अब तक 60 पेंटिंग बना चुकी है।
पिथौरा चित्रकला अलिराजपुर जिले की लोक कला है, पिथौरा चित्रकला एक अनुष्ठान है और यह चित्रकला पुरूषों द्वारा की जाती है। अब यह विलुप्त होती जा रही है। महिलाओं को दीवार पर पिथौरा चित्रकला करना निषेध है और साक्षी पिथौरा चित्रकला को केनवास और अन्य वस्तुओं पर करके हमारे क्षेत्र की विलुप्त होती जा रही पिथौरा चित्रकला के संरक्षण पर कार्य कर रही है।

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जोबट में उभरती हुई प्रतिभा साक्षी भयडीया पेंटिंग बना कर दिखा रही है अपनी प्रतिभा | New India Times

साक्षी भयडीया ने हमारे संवाददाता को बताया कि हमारे आदिवासी समाज के महानायक है, जिन्होंने अपने समाज व देश के लिए जो कार्य किया और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जो उन्हें मिलना चाहिए था। उन महानायक की पेंटिंग बनाकर उनके बारे में बता रही हैं और समाज को जागरूक कर रही हैं ताकि हमारे समाज के लोग भी उन महापुरुषों को जानें जिन्होंने समाज व देश के लिए बलिदान दिया। तकी सब उनका सम्मान करें।
साक्षी भयड़िया बताया कि हमेशा से ही दूसरों से अलग विषय पर कार्य करने इच्छा थी. पेंटिंग के अलावा आदिवासी लोक कला की वस्तुएं भी डिजाइन करती हूं। जैसे कि तीर कमान, बहनी रूमाल गमछा चाबी के छल्ले व तोरण आदिवासी लोक कला की वस्तुएं डिजाइन की जाती है और समाज की महिलाओं को एक स्व रोजगार देने की इच्छा भी रखती हूं।

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