उभरती प्रतिभा साक्षी मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिले आलीराजपुर में बनाई पेंटिंग आदिवासी घड़ी | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (मप्र), NIT:

उभरती प्रतिभा साक्षी मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिले आलीराजपुर में बनाई पेंटिंग आदिवासी घड़ी | New India Times

आदिवासी बाहुल्य अलीराजपुर जिला के जोबट में प्रतिभा की धनी साक्षी भयडीया पेंटिंग बनाने की शौक के चलते उभरती हुई प्रतिभा 21 वर्षीय साक्षी भयडीया अब तक 60 पेंटिंग बना चुकी है. उनके बनाए हुए पेंटिंग प्राकृतिक और प्रकृति के करीब होते हैं. पहली पेंटिग इन्होंने 15 साल की उम्र में बनाई थी. कॉलेज और घर से प्रेरणा ली और खुद को एक कलाकार के रूप में स्थापित किया।
एक चित्र को बनाने में इनको 3 दिन का समय लग जाता है आज भी लगातार 3 घंटे अभ्यास और मेहनत करती है पेंटिंग कला से प्यार ने इनको कलाकार बना दिया।
*इन्होने हाल ही में आदिवासी समाज की पृथ्वी के समान दिशा में चलने वाली जो इस समय की घड़ी के विपरीत चलेगी उस घड़ी को डिजाइन किया और पेंटिंग के माध्यम से उसमें बहुत सारी आदिवासी संस्कृति को समाहित किया है जो लोगों को बहुत पसंद आ रही है और इनके पास वर्तमान में 100 से अधिक ऑर्डर मिल चुका है विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त से पहले लोगों तक पहुंचाना है।

उभरती प्रतिभा साक्षी मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिले आलीराजपुर में बनाई पेंटिंग आदिवासी घड़ी | New India Times

इनकी भविष्य में योजना है कि आदिवासी और अन्य महापुरुषों की चित्रकला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाए हाथों से बनाई हुई पेंटिंग जन जन तक सोशल मीडिया और प्रदर्शनी के जरिए पहुंचे लोगों को प्राकृतिक कला और छोटे बच्चों को पेंटिंग कला से प्रेरणा मिले लोगों को कला के प्रति प्रेरित करना है और आज के जमाने में भी कला को जीवित रखना है इनके हौसले और मेहनत और लगन से लोग प्रेरित हो इस प्राचीन कला को ना भूले.

उभरती प्रतिभा साक्षी मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिले आलीराजपुर में बनाई पेंटिंग आदिवासी घड़ी | New India Times

ज्ञात रहे साक्षी के पिताजी श्री लक्ष्मण भयडिया की जोबट में मोटर सुधारने की दुकान है जिसे जिस पर काम करने के साथ अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया है और अपनी बेटी पर गर्व है इसी आशा के साथ साक्षी अपनी मां शारदा भयड़िया के आशिर्वाद से अपने अंदर कला को निखारे लगातार मेहनत से आगे बढ़ती रहे।

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