मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ वर्षों से किया जा रहा है खिलवाड़ | New India Times

अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ वर्षों से किया जा रहा है खिलवाड़ | New India Times

जमीअत उलमा मध्यप्रदेश ने सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ वर्षों से खिलवाड़ किया जा रहा है लेकिन सकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के प्रेस सचिव हाजी मोहम्मद इमरान ने बताया कि जमीअत उलमा द्वारा लगभग पंद्रह वर्षों से प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून के मार्गदर्शन में सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती की मांग की जा रही है लेकिन सरकार उर्दू शिक्षकों की भर्ती को लेकर गंभीर नही दिखाई दे रही है। जिस का खमियाज़ा उर्दू पढ़ने वाले बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। कोरोना काल के पश्चात जल्द ही भोपाल और मध्यप्रदेश के सभी स्कूल खुलने वाले हैं पर सरकारी स्कूलों में उर्दू के प्रयाप्त शिक्षक अभी तक नही हैं। जिससे उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के साथ वर्षों से खिलवाड़ हो रहा है पर मध्यप्रदेश शासन का इस और कोई ध्यान नही ।आज एक बार फिर जमीअत उलमा मध्यप्रदेश की टीम हाजी मोहम्मद इमरान, मोहम्मद कलीम एडवोकेट, मौलाना हनीफ़, मुफ्ती मोहम्मद राफे, मुजाहिद मोहम्मद खान, ने सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षक की भर्ती किए जाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री मोहदय को ज्ञापन भेज कर मांग को दोहराया है कि स्कूलों के खुलने से पूर्व सरकारी स्कूलों में उर्दू भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों की प्रयाप्त भर्ती की जाए हाजी इमरान ने मध्यप्रदेश सरकार से यह भी मांग की है कि कई शहरों में उर्दू शिक्षक भर्ती के केस भी पेंडिंग में हैं जिनको न्यालय से तो राहत मिल चुकी है पर उनको पद भार नही दिया जा रहा। वहीं दूसरी ओर शहर के विकास और बोर्डो से भी उर्दू भाषा को वंचित किया जा रहा है जबकि हिंदी भाषा के बाद सबसे बड़ी भाषा उर्दू है जिसको हर व्यक्ति बोलता और पढ़ता है। मध्यप्रदेश में उर्दू अकेडमी तो है पर उर्दू भाषा का संरक्षण नहीं है यह अफ़सोसनाक है। जमीअत उलमा की टीम द्वारा यह भी मांग की गई के उर्दू एकेडमी का गठन पुनर्रूप से किया जाए और ऐसे लोगों को एकेडमी में जगह दी जाए जो उर्दू ज़बान के फ़रोग़ के लिए कार्य कर सकें एवं स्कूलों के खुलने से पूर्व सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती की जाए ताकि उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

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