अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

प्रयागराज के गऊघाट में 02 मई को पुलिस बल द्वारा सैकड़ों वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे गरीब दलित परिवारों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान पुलिस द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट की गई तथा लोगों के जरूरी सामान को भी तहस-नहस कर दिया गया। इसी के विरोध में भाकपा माले द्वारा मंडलायुक्त कार्यालय के समक्ष पीड़ित परिवारों की आवाज उठाई गई।

विरोध प्रदर्शन करते हुए मंडलायुक्त कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से पीड़ित गरीब दलित परिवारों को आवास, जमीन, रोजगार और न्यूनतम ₹2 लाख मुआवजा दिए जाने की मांग की गई। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे प्रयागराज में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई।
भाकपा माले जिला प्रभारी सुनील मौर्य ने कहा कि अमीरों को सुविधा देने और भूमाफियाओं के हित में विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ा जा रहा है। प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई रात में की गई, जो साफ तौर पर कानून का उल्लंघन है। मौजूदा सरकार गरीबों की आवाज सुनने के बजाय तानाशाही रवैया अपनाए हुए है।
प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य एवं आइसा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि यह बुलडोजर सिर्फ गरीब दलितों के घरों पर नहीं, बल्कि संविधान पर चलाया जा रहा है। सरकार गरीबों की आवाज सुनने के बजाय तानाशाही कर रही है। यदि सरकार उद्योगपतियों को ₹1 में 1000 एकड़ जमीन दे सकती है, तो गरीबों को आवास, जमीन, रोजगार और मुआवजा भी देना होगा। सरकार का दायित्व वंचित लोगों के साथ न्याय करना है, न कि उन्हें बेदखल कर उजाड़ देना। उन्होंने कहा कि यह कृत्य शर्मनाक, कानून और संविधान विरोधी है तथा इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शन में शामिल आरवाईए के प्रदेश सह सचिव सोनू यादव ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना बंद किया जाए तथा उनके रहने की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही रोजगार और ₹2 लाख मुआवजा दिया जाए, तभी सही मायनों में न्याय संभव होगा।
प्रदर्शन में आइसा सह सचिव मानवेन्द्र यादव, अधिवक्ता प्रदीप ओबामा, सोनू, सोनाली, छोटकी, मोहिनी, संगीता, राखी, रंजीत, राकेश, मनोज, धर्मेंद्र, साधना, खुशबू, उर्मिला, अभिषेक, विजय, अजय, गुड्डी, बिंदु, गोलू, दीपक, श्याम, काली, रोशनी समेत दर्जनों महिलाएं, बच्चे और कार्यकर्ता शामिल रहे।

