मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव की ग्राम पंचायत चिकलमऊ के वार्ड क्रमांक 7 में इन दिनों पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। मोक्ष धाम के पास स्थित सरकारी कुएं का पानी गंदगी और कचरे से भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि पंचायत के जिम्मेदार सचिव अब तक इसे साफ कराने की जहमत तक नहीं उठा पाए हैं।
वार्ड के लगभग 15 से 20 मकानों में रहने वाले 100 से अधिक नागरिक इसी कुएं के पानी पर निर्भर हैं। भीषण गर्मी में, जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब ग्रामीणों को मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। कुएं में कचरा और मटमैला पानी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय ग्रामीण मुनेश यदुवंशी, ईश्वरी मर्सकोले और मनोज मर्सकोले ने बताया कि कई बार पंचायत सचिव और सरपंच को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सवाल यह उठता है कि जब हालात इतने खराब हैं, तो जिम्मेदार आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
सीईओ सजग, लेकिन पंचायत स्तर पर लापरवाही हावी
वहीं, जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रश्मि चौहान क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों का दौरा कर पेयजल व्यवस्था को लेकर लगातार सजग और सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, ताकि नागरिकों को समय पर स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके। इसके बावजूद ग्राम स्तर पर सचिव और सरपंच की लापरवाही इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
गर्मी के इस दौर में, जहां शासन-प्रशासन पेयजल उपलब्ध कराने के दावे कर रहा है, वहीं सचिव और सरपंच इन दावों को गलत साबित करते नजर आ रहे हैं। चिकलमऊ के वार्ड 7 में हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां लापरवाही का आलम यह है कि पीने का पानी तक साफ नहीं मिल पा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पंचायत सचिव और सरपंच की नींद किसी बड़ी घटना के बाद ही खुलेगी, या फिर समय रहते ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा?
