मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

ग्राम स्वराज्य महामंच की ओर से शहर में पहली बार विचारवंत परिषद एवं परिचय मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता वामनराव सिडाम (अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद) ने की, जबकि उद्घाटन ग्राम स्वराज्य मंच की संचालिका आशाताई काळे के हाथों हुआ।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में एडवोकेट वामनराव चटप, प्राचार्य पृथ्वीराज राजपूत, डॉ. प्रशांत विघे, डॉ. पद्माताई राजपूत तथा स्वागताध्यक्ष मधुसूदन कोवे गुरुजी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में यवतमाल के प्रसिद्ध शायर बेताब को उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए ‘समाज गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने अपनी खास अंदाज़ में “कोशिश शायरी” प्रस्तुत कर महिलाओं और कलाकारों को प्रेरित किया।
इस दौरान वरिष्ठ कवयित्री संगीता नागदिवे ने बाल साहित्य पर अपने विचार रखे। वहीं कवयित्री प्रिया डाखोडे ने कलाकारों के सम्मान और उचित मानधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कलाकारों को आय प्रमाण पत्र जैसी शर्तों में नहीं बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कलाकारों के मानधन में वृद्धि की भी मांग की।
कवि किशोर इंगळे ने कहा कि यवतमाल की पहचान एक शांत शहर के रूप में रही है, जो अब धीरे-धीरे बदल रही है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
हालांकि डॉ. अंजली गवार्ले कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने दूरभाष के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
कार्यक्रम के समापन पर मधुसूदन कोवे ने कहा कि यवतमाल में पहली बार आयोजित यह विचारवंत परिषद एवं परिचय मेला सफल रहा और लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला। पूर्व विधायक एडवोकेट वामनराव चटप ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय समाज में लोकतंत्र को मजबूत करने और सामाजिक एकता बनाए रखने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विचारों का मंथन आवश्यक है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और अंत में सभी ने सामूहिक रूप से भोजन का आनंद लिया।

