दमोह में कौमी एकता की मिसाल: मुस्लिम भाइयों ने ‘हिंदू बुआ’ को दिया कंधा, पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार | New India Times

इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, दमोह (मप्र), NIT:

दमोह में कौमी एकता की मिसाल: मुस्लिम भाइयों ने ‘हिंदू बुआ’ को दिया कंधा, पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार | New India Times

दमोह में एक बार फिर कौमी एकता की मिसाल देखने को मिली, जहां मुस्लिम भाइयों ने एक हिंदू बुजुर्ग महिला को कंधा देकर उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया।
मध्यप्रदेश के दमोह जिले में अष्टमी के दिन बुजुर्ग ताराबाई तिवारी का निधन हो गया। पूजा-अर्चना के कारण समाज के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम भाइयों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली और पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार कराया।

दमोह में कौमी एकता की मिसाल: मुस्लिम भाइयों ने ‘हिंदू बुआ’ को दिया कंधा, पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार | New India Times

भारत की एकता और अखंडता यूं ही विश्वभर में प्रसिद्ध नहीं है। यहां लोग धर्म और मजहब से ऊपर उठकर एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं। दमोह से सामने आई यह घटना इसी भाईचारे की जीती-जागती मिसाल है।

दमोह में कौमी एकता की मिसाल: मुस्लिम भाइयों ने ‘हिंदू बुआ’ को दिया कंधा, पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार | New India Times

दमोह नगर के पुराना बाजार वार्ड में रहने वाली ताराबाई तिवारी को मोहल्ले में सभी “बुआ” के नाम से जानते थे। इस इलाके की खासियत यह है कि यहां आज भी लोग पुरानी परंपराओं और आपसी भाईचारे को निभाते हैं। इसी बस्ती में एक प्राचीन हजारी जी का मंदिर भी स्थित है, जहां ताराबाई तिवारी का आना-जाना रहता था।

अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण ताराबाई तिवारी का गुरुवार (अष्टमी) के दिन निधन हो गया। अष्टमी की पूजा के चलते उनके समाज के लोग अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में पड़ोस के मुस्लिम भाइयों ने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मिलकर उन्हें कंधा दिया और श्मशान घाट तक ले जाकर अंतिम संस्कार किया।

परिवार के सदस्य मोनू तिवारी ने बताया कि, “इस दुख की घड़ी में हमारे वार्ड के सभी मुस्लिम भाइयों ने आगे आकर हमारी दादी के अंतिम संस्कार में पूरा सहयोग किया। हम हमेशा से मिलजुल कर रहते आए हैं।”

वार्ड के ही शहबाज़ खान, मोहसिन खान और मुबारक खान सहित अन्य मुस्लिम युवकों ने न सिर्फ अंतिम यात्रा में कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट तक साथ जाकर अपनी “तारा बुआ” को अंतिम विदाई भी दी।

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