मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

ग्राम धामनगांव में आयोजित मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेले के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। इस दिन का प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध सप्तखंजिरी वादक एवं कीर्तनकार संदीप पाल महाराज का प्रभावशाली सप्तखंजिरी कीर्तन रहा, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया।
संदीप पाल महाराज अपनी अनूठी “फुल कॉमेडी कीर्तन” शैली के लिए देशभर में विख्यात हैं। उन्होंने अपने कीर्तन में भक्ति रस के साथ हास्य-व्यंग्य का ऐसा संतुलित और सजीव समावेश प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को न केवल आनंदित किया, बल्कि गहराई से प्रभावित भी किया। उनके द्वारा प्रस्तुत भजन, कथाएं और प्रसंगों में जहां आध्यात्मिक गूढ़ता झलकती रही, वहीं सरल भाषा और चुटीले अंदाज़ ने हर वर्ग के लोगों को सहज रूप से जोड़ लिया।
कीर्तन के दौरान महाराज ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, जीवन की भागदौड़, पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों पर हास्य के माध्यम से तीखे लेकिन सकारात्मक संदेश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि भक्ति का मार्ग कठिन नहीं, बल्कि सरल और आनंदमयी होना चाहिए, जिससे आमजन भी सहजता से उससे जुड़ सके। उनकी लयबद्ध सप्तखंजिरी वादन शैली, प्रभावी मंच संचालन और संवादात्मक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। पूरा मेला परिसर तालियों की गड़गड़ाहट, हर्षोल्लास और जयघोष से गूंज उठा। यह दृश्य न केवल एक धार्मिक आयोजन का था, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जीवंतता का भी प्रतीक बनकर उभरा।
इस अवसर पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ बैठकर कीर्तन का श्रवण किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामवासियों के उत्साह और सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेला आज क्षेत्र की पहचान बन चुका है।
उल्लेखनीय है कि यह मेला 19 मार्च से 27 मार्च (श्रीराम नवमी) तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की विविध श्रृंखला चल रही है। भजन संध्या, कीर्तन, पारंपरिक दंगल, लावणी नृत्य, व्यायामशाला प्रदर्शन, खेल प्रतियोगिताएं, कृषि आधारित प्रशिक्षण और हस्तशिल्प बाजार जैसे आयोजन मेले को बहुआयामी स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।

