डॉ. राम मनोहर लोहिया पीजी कॉलेज में एनएसएस की प्रयोगधर्मी कार्यशाला, विद्यार्थियों ने सीखे समस्या समाधान और नेतृत्व कौशल | New India Times

निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

डॉ. राम मनोहर लोहिया पीजी कॉलेज में एनएसएस की प्रयोगधर्मी कार्यशाला, विद्यार्थियों ने सीखे समस्या समाधान और नेतृत्व कौशल | New India Times

डॉ. राम मनोहर लोहिया पीजी कॉलेज, इटवा, सिद्धार्थनगर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की डॉ. राम मनोहर लोहिया इकाई एवं स्वामी विवेकानंद इकाई के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पवन कुमार पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला पारंपरिक औपचारिकता से हटकर प्रयोगधर्मी स्वरूप में संपन्न हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अष्टभुजा पाण्डेय के विशिष्ट उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम को नई दिशा प्रदान की।

डॉ. राम मनोहर लोहिया पीजी कॉलेज में एनएसएस की प्रयोगधर्मी कार्यशाला, विद्यार्थियों ने सीखे समस्या समाधान और नेतृत्व कौशल | New India Times

इस कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसे केवल भाषणों तक सीमित न रखकर सहभागितापूर्ण (Participatory) मॉडल पर आधारित किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. पवन पाण्डेय ने “संवाद के माध्यम से समाधान” की अवधारणा को केंद्र में रखा। विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर उन्हें वास्तविक सामाजिक एवं शैक्षणिक चुनौतियों पर विचार करने और व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करने का दायित्व दिया गया।

स्वामी विवेकानंद इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संतोष कुमार पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य—विशेषकर कौशल-आधारित शिक्षा, नैतिक नेतृत्व और डिजिटल साक्षरता—पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज में “समस्या-समाधानकर्ता” (Problem Solver) की भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण आयाम “आत्ममूल्यांकन सत्र” रहा, जिसमें स्वयंसेवकों ने अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं, कमजोरियों और लक्ष्यों पर खुलकर चर्चा की। विद्यार्थियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण तथा युवाओं में बढ़ती डिजिटल निर्भरता जैसे विषयों पर गंभीर विचार प्रस्तुत किए। यह पहल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और विश्लेषणात्मक सोच को प्रोत्साहित करने वाली सिद्ध हुई।

इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में “मंच संचालन प्रशिक्षण” का एक लघु सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को सार्वजनिक वक्तृत्व (Public Speaking) के व्यावहारिक सूत्र बताए गए। इससे कार्यशाला केवल विचार-विमर्श का मंच न रहकर कौशल-विकास का अवसर बन गई।

समापन अवसर पर डॉ. पवन कुमार पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ तभी सार्थक होती हैं जब वे विद्यार्थियों के भीतर दीर्घकालिक परिवर्तन की प्रेरणा जगाएँ। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को सामुदायिक स्तर पर भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि महाविद्यालय और समाज के बीच सक्रिय संवाद स्थापित हो सके।

इस प्रकार यह कार्यशाला परंपरागत औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक प्रयोगात्मक, चिंतनशील और कौशल-आधारित आयोजन के रूप में सामने आई, जिसने प्रतिभागियों को केवल श्रोता नहीं बल्कि सक्रिय सहभागी बनने का अवसर प्रदान किया।

इस अवसर पर प्रवक्ताओं में अंकित त्रिपाठी, सूर्यनारायण मणि त्रिपाठी, अम्बिकेश्वर त्रिपाठी, राकेश दूबे तथा स्वयंसेवकों में रुखसाना, आकांक्षा, वर्षा, अमित, कोमल, वासुदेव आदि ने सहभागिता की।

कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संतोष कुमार पाण्डेय ने कार्यशाला में उपस्थित सभी अतिथियों, प्रवक्ताओं एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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